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बुडापेस्ट। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में भारतीय महिला पहलवानों ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया, किसी ने दमदार दांव से स्वर्ण जीता, किसी ने जुझारूपन दिखाकर कांस्य अपने नाम किया तो किसी का गोल्ड जीतने का सपना चोट की वजह से अधूरा रह गया। चौथे दिन भारत के लिए सबसे बड़ी खुशी काजल ढोचक ने स्वर्ण पदक जीतकर दी जबकि अंतिम पंघाल और नेहा शर्मा ने रजत तथा निशु ने कांस्य पदक जीतकर देश की झोली में कुल चार पदक डाल दिए। काजल ने फाइनल में दिखाया चैंपियन वाला दम 'पोल्याक इमरे, वर्गा जानोस और कोज़्मा इस्तवान मेमोरियल सीनियर रैंकिंग टूर्नामेंट 2026' में मौजूदा अंडर-20 विश्व चैंपियन काजल ढोचक शानदार लय में नजर आईं। 76 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उनका मुकाबला अमेरिका की पूर्व पैन अमेरिकन चैंपियन डायमंड गिलफोर्ड से हुआ। दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ। हालांकि, क्राइटेरिया के आधार पर काजल को विजेता घोषित किया गया और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इससे पहले सेमीफाइनल में काजल ने रोमानिया की पूर्व यूरोपीय चैंपियन अलेक्जेंड्रा एंगेल को 9-0 से एकतरफा हराकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी थी। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीन की शुइयान चेंग को 3-0 से मात दी थी। अंतिम ने एक के बाद एक मुकाबले जीते, लेकिन चोट ने तोड़ दिया सपना 21 वर्षीय अंतिम पंघाल ने शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। उन्होंने पहले तीनों मुकाबले 10-0 के तकनीकी श्रेष्ठता से जीतकर विरोधियों को कोई मौका नहीं दिया। जर्मनी की बियांका फाथ, चीन की ली युक्सुआन और अमेरिका की क्रिस्टेल रोड्रिगेज उनके सामने टिक ही नहीं सकीं। इसके बाद सेमीफाइनल में अंतिम का सामना मौजूदा एशियाई चैंपियन चीन की झांग जिन से हुआ। रोमांचक मुकाबले में उन्होंने 7-5 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बनाई। लेकिन, फाइनल से पहले लगी चोट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। स्वीडन की एम्मा माल्मग्रेन के खिलाफ फाइनल खेलने से पहले ही उन्हें हटना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नेहा ने भी दिखाई शानदार लय 57 किलोग्राम वर्ग में नेहा शर्मा ने भी पूरे दिन बेहतरीन कुश्ती दिखाई। उन्होंने क्वालिफिकेशन में कनाडा की मिया फ्राइसन को क्राइटेरिया के आधार पर हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में अमेरिका की पैन अमेरिकन चैंपियन अमांडा मार्टिनेज को 6-1 और सेमीफाइनल में ब्राजील की जियूलिया पेनालबर को 4-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।फाइनल में उनका मुकाबला चीन की ओलंपिक पदक विजेता होंग केक्सिन से हुआ, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक मिला। निशु ने हार के बाद की शानदार वापसी 53 किलोग्राम वर्ग में निशु ने हार नहीं मानी। शुरुआती मुकाबले में उन्होंने नातिया स्वानिद्जे को 11-10 से हराया, लेकिन अगले दौर में एम्मा माल्मग्रेन से हार गईं। रेपेचाज के जरिए मिले दूसरे मौके का उन्होंने पूरा फायदा उठाया। पहले कनाडा की मैडिसन पार्क्स को हराया और फिर रोमानिया की ओलंपियन आंद्रेया बीट्रिस एना को 2-2 के बराबरी वाले मुकाबले में क्राइटेरिया के आधार पर मात देकर कांस्य पदक जीत लिया। कुछ पहलवान पदक से चूके 76 किलोग्राम वर्ग में प्रिया मलिक कांस्य पदक मुकाबले में चीन की वेनजी ली से 5-3 से हार गईं। वहीं ग्रीको-रोमन 72 किलोग्राम वर्ग में अनिल भी कांस्य पदक मुकाबले में जॉर्जिया के मिशिको अलेक्जेंड्रिया से 5-2 से हारकर पदक से चूक गए।पूर्व एशियाई चैंपियन सुनील कुमार भी ग्रीको-रोमन 87 किलोग्राम वर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गए। दीक्षा मलिक पदक दौर तक नहीं पहुंच सकीं जबकि तपस्या चोट के कारण शुरुआती दौर में ही प्रतियोगिता से बाहर हो गईं। अब अंतिम दिन इन पहलवानों पर रहेंगी निगाहें प्रतियोगिता के आखिरी दिन भारत की उम्मीदें ग्रीको-रोमन पहलवानों पर टिकी होंगी। एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे नितेश कुमार (97 किग्रा) के अलावा ललित (55 किग्रा), चेतन (60 किग्रा), सुमित (60 किग्रा), सनी कुमार (63 किग्रा), प्रिंस (82 किग्रा) और दीपांशु (130 किग्रा) भारत की चुनौती पेश करेंगे।



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