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पटना: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ने बांकीपुर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बदले जाने को लेकर आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और कहा कि जनता जब विकल्प के साथ खड़ी होती है तो कोई भी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र किसी दल या नेता की जागीर नहीं रह जाता, बांकीपुर जैसे कथित गढ़ भी डगमगाने लगते हैं और बिहार पर किसी ऐसे चेहरे को नहीं थोपा जा सकता जिसकी छवि, आचरण और क्षमता पर खुद जनता तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सवाल हों। कोई सीट किसी की बपौती नहीं पीके ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि देश में कोई भी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र किसी नेता या पार्टी की निजी जागीर नहीं है । उन्होंने कहा कि जब जनता को विकल्प मिलता है, तो सबसे मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक किले भी हिलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जनता अगर उठ खड़ी हो जाए तो बड़े-बड़े नेताओं के पसीने छूट जाते हैं , और यही बदलाव अब बिहार की राजनीति में दिख रहा है। बांकीपुर सीट पर भाजपा को घेरा श्री किशोर ने बांकीपुर विधानसभा सीट का खास तौर पर जिक्र किया और कहा कि कुछ समय पहले तक भाजपा के लोग दावा करते थे कि बांकीपुर उनका ऐसा गढ़ है, जहां अगर वे कुत्ता या बिल्ली को भी टिकट दे दें तो जनता उसे जिता देगी । लेकिन, अब प्रशांत किशोर के मुताबिक, हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि अब जब जनता के सामने विकल्प आया है तो भाजपा उम्मीदवार खोजने के लिए जूझ रही है । उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज तो ऐसा लग रहा है कि उनका अपना उम्मीदवार भी किसी वजह से चुनावी मैदान से हट गया है । 3 तारीख को पूरा हिसाब हो जाएगा जन सुराज के सूत्रधार ने कहा कि फिलहाल भाजपा अपनी स्थिति संभालने में लगी है लेकिन 3 अगस्त को नतीजे आने के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी । उनका इशारा साफ था कि वे चुनावी नतीजों को भाजपा के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब सिर्फ पार्टी के नाम पर वोट देने के मूड में नहीं है, बल्कि उम्मीदवार और नेतृत्व को भी परख रही है। सम्राट चौधरी पर सीधा हमला पीके ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी सीधा निशाना साधा और कहा कि भाजपा के अपने समर्थक, कार्यकर्ता और नेता भी यह समझते हैं कि सम्राट चौधरी जैसे व्यक्ति को सिर्फ ताकत के दम पर बिहार का मुख्यमंत्री नहीं थोपा जा सकता । उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि मुख्यमंत्री किस जाति या किस समुदाय से हो। असली सवाल यह है कि बिहार का मुख्यमंत्री कौन ऐसा हो सकता है जो सक्षम हो, योग्य हो, ईमानदार हो और पढ़ा-लिखा हो । बिहार को आगे बढ़ाना है तो चेहरा भी वैसा होना चाहिए श्री किशोर ने कहा कि अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो राज्य को ऐसा नेतृत्व चाहिए जिसकी छवि साफ हो, काम करने की क्षमता हो और जो राज्य को विकास की दिशा में ले जा सके । उन्होंने कहा कि सिर्फ राजनीतिक समीकरणों या जातीय संतुलन के आधार पर मुख्यमंत्री चुनने से बिहार आगे नहीं बढ़ेगा।