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पटना। बिहार सरकार ने पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए नीलामी से पहले ही खनन योजना तैयार कराने एवं पर्यावरणीय स्वीकृति लेने की व्यवस्था को मंजूरी दी है, जिससे खदानों का संचालन जल्दी शुरू हो सकेगा और निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की उपलब्धता के साथ सरकार को समय पर राजस्व भी मिल सकेगा। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सूत्रों ने बुधवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। ई-नीलामी से पहले पूरी होगी जरूरी तैयारी मंत्रिपरिषद ने बिहार में अनुमोदित जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (डीएसआर) में चिन्हित पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी से पहले खनन योजना तैयार कराने और पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड (बीएसएमसीएल) को एजेंसी नामित करने की मंजूरी दी है। अब नहीं होगी महीनों की देरी सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी पत्थर भूखंड की बंदोबस्ती के बाद संचालन शुरू करने के लिए खनन योजना और पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य होती है। वर्तमान व्यवस्था में इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करने में लगभग 250 दिन लग जाते हैं। इससे न केवल सरकार के राजस्व संग्रह में देरी होती है, बल्कि निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की आपूर्ति भी प्रभावित होती है। खनन निगम पहले से लेगा मंजूरी नई व्यवस्था के तहत बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड जिन पत्थर भूखंडों की नीलामी कराना चाहेगा, उनके लिए वह अपने निदेशक मंडल की स्वीकृति के बाद नीलामी से पहले ही खनन योजना तैयार करा सकेगा और पर्यावरणीय स्वीकृति भी हासिल कर सकेगा। नीलामी के बाद विजेता को मिलेगा तैयार प्रोजेक्ट सरकार ने तय किया है कि नीलामी पूरी होने के बाद संबंधित खनन योजना और पर्यावरणीय स्वीकृति सफल बोलीदाता या बंदोबस्तधारी के नाम स्थानांतरित कर दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया पर जो खर्च आएगा, उसकी वसूली खनिज समाहर्ता द्वारा बंदोबस्तधारी से की जाएगी। निर्माण परियोजनाओं को मिलेगा फायदा सरकार का मानना है कि इस फैसले से पत्थर भूखंडों का संचालन नीलामी के तुरंत बाद शुरू कराया जा सकेगा। इससे सड़क, पुल, भवन और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए पत्थर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी। राजस्व बढ़ेगा, आपूर्ति भी होगी मजबूत नई व्यवस्था लागू होने से राज्य सरकार को समय पर राजस्व प्राप्त होगा और खनन कार्यों में आने वाली प्रशासनिक देरी भी कम होगी। साथ ही विभिन्न विकासात्मक और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए पत्थर की आपूर्ति सुचारु बनी रहेगी। क्यों अहम है यह फैसला बिहार में खनन क्षेत्र से जुड़े कारोबार और निर्माण गतिविधियों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब ई-नीलामी के बाद लंबी मंजूरी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे खदानें जल्दी चालू होंगी, बाजार में पत्थर की उपलब्धता बढ़ेगी और सरकारी खजाने को भी तेजी से राजस्व मिलेगा।