Full Story

नई दिल्ली। खनन क्षेत्र की गतिविधि सुस्त रहने के बावजूद देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जून 2026 में विनिर्माण, बिजली एवं गैस सहित अधिकांश क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन के दम पर सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में आईआईपी सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़ा , जो पिछले कई महीनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है। मई 2026 में यह वृद्धि 5 प्रतिशत थी जबकि पिछले वर्ष जून में केवल 2.2 प्रतिशत रही थी। इससे साफ है कि देश में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार मजबूत हुई है। विनिर्माण क्षेत्र बना सबसे बड़ा सहारा इस वर्ष जून में औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की रही। इस क्षेत्र का उत्पादन 7.8 प्रतिशत बढ़ा। खास बात यह रही कि विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 19 उपक्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा , जिससे यह संकेत मिलता है कि औद्योगिक वृद्धि केवल कुछ उद्योगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका दायरा व्यापक रहा। बिजली और गैस क्षेत्र में सबसे तेज बढ़ोतरी उद्योगों को ऊर्जा आपूर्ति देने वाले बिजली और गैस क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन किया। जून में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 10.6 प्रतिशत रही, जो सभी प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक है। वहीं जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत खनन क्षेत्र की रफ्तार काफी धीमी रही और इसमें केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बिजली उपकरण और ऑटोमोबाइल उद्योग चमके विनिर्माण क्षेत्र के भीतर भी कई उद्योगों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे अधिक 34 प्रतिशत की वृद्धि बिजली उपकरण उद्योग में दर्ज की गई। इसके बाद मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर उद्योग का उत्पादन 17.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि खाद्य उत्पादों के विनिर्माण में 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एनएसओ के अनुसार, वाहन और ऑटो पार्ट्स उद्योग ने औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पहली तिमाही में भी उत्पादन मजबूत रहा चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के आंकड़े भी उत्साहजनक रहे। इस दौरान देश का औद्योगिक उत्पादन 5.8 प्रतिशत बढ़ा। विनिर्माण क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत , जबकि बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र का उत्पादन भी करीब 6 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि, पहली तिमाही में खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसमें 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।