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नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से चल रहे पीजी की इमारत ढहने से मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है जबकि पांच घायलों का इलाज जारी है वहीं 24 घंटे से अधिक समय तक चले बचाव अभियान के बाद मलबे में किसी के फंसे नहीं होने की पुष्टि के बीच एमसीडी ने दक्षिण जोन के उपायुक्त समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है तथा पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। 24 घंटे से ज्यादा चला रेस्क्यू, अब मलबे में कोई नहीं दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इमारत गिरने के बाद कई एजेंसियों ने रातभर बचाव अभियान चलाया। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, एनडीआरएफ और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश करती रहीं। अब पुलिस ने पुष्टि की है कि मलबे में कोई व्यक्ति फंसा नहीं है और 24 घंटे से अधिक समय तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मलबे से कुल 12 लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया , जिनमें सात लोगों की मौत हो गई और पांच का इलाज चल रहा है। सात मौतें, तीन घायलों की हालत गंभीर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों में छह लोगों की पहचान हो चुकी है जबकि सातवें मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के सोनभद्र निवासी 20 वर्षीय अभिषेक, छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 20 वर्षीय युवराज सोनी, उत्तर प्रदेश के औरैया निवासी 17 वर्षीय पवन, मध्य प्रदेश के देवास निवासी 19 वर्षीय अर्पित जहाज, मध्य प्रदेश के कटनी निवासी 18 वर्षीय अक्षत सिंह यादव और 75 वर्षीय सुरिंदर सिंह के रूप में हुई है। वहीं, घायलों में 30 वर्षीय असगर अली, 19 वर्षीय नीरज बावा, 19 वर्षीय आदित्य कुमार, 19 वर्षीय नितीश चिब और 18 वर्षीय मोहम्मद अयान शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। एम्स ने बताया कि घायलों का इलाज जारी है। एक घायल के हाथ-पैर से जुड़ी सर्जरी की गई है।वहीं मामूली रूप से घायल एक व्यक्ति को कुछ समय निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एमसीडी की बड़ी कार्रवाई, पांच अधिकारी निलंबित हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अपने स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण जोन के उपायुक्त समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार , भवन विभाग के कार्यकारी अभियंता ललित कुमार गोयल , सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार शामिल हैं। पांचवें निलंबित अधिकारी का नाम तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। नगर निगम के सतर्कता विभाग ने निगम आयुक्त संजीव खिरवार के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम सेवा (नियंत्रण एवं अपील) विनियम, 1959 के तहत निलंबन आदेश जारी किए हैं। आदेशों पर सतर्कता विभाग के उप विधि अधिकारी नंद किशोर के हस्ताक्षर हैं। सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नियमों के तहत निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। भिवाड़ी से पकड़ा गया हरिराम गुप्ता दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक और प्रबंधन से जुड़े हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया है। इमारत ढहने के बाद कथित तौर पर संपर्क से बाहर होने पर पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया था। पुलिस के मुताबिक, हरिराम को भिवाड़ी में पकड़ा गया और हादसे से जुड़े हालात को लेकर उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्ट में केवल हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि उन्हें पीजी का मालिक और प्रबंधक माना जा रहा था। लेकिन, आगे की जांच में सामने आया कि बिजली का कनेक्शन हरिराम के नाम पर था, जबकि कागजों में प्रॉपर्टी की मालकिन उनकी पत्नी उर्मिला थीं। उनका बेटा महेश गुप्ता प्रबंधन का काम संभालता था। इसके बाद उर्मिला और महेश को भी गिरफ्तार किया गया। 15 कमरों की इमारत, हर कमरे में रहते थे 2 से 3 छात्र हादसा रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे हुआ था। जिस इमारत में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से पीजी संचालित किया जा रहा था, उसमें करीब 15 कमरे थे। प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। इमारत के भूतल पर एक मेडिकल स्टोर भी चल रहा था। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास स्थित थी, जहां बड़ी संख्या में छात्र किराये और पीजी में रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं। इनमें से कई छात्र पास स्थित मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। यही वजह है कि हादसे के बाद छात्रों और उनके परिवारों में भी चिंता का माहौल रहा। बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यही है कि इमारत की संरचनात्मक हालत कैसी थी और बेसमेंट में किया जा रहा मरम्मत कार्य हादसे की वजह बना या नहीं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हवाले से सामने आए शुरुआती आकलन के अनुसार, पुरानी हो चुकी इमारत के बेसमेंट में मरम्मत संबंधी काम किया गया था। प्रारंभिक आकलन में बेसमेंट में जमा पानी को भी इमारत की संरचना कमजोर होने के संभावित कारणों में माना जा रहा है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इमारत की संरचना, मरम्मत कार्य और बेसमेंट की स्थिति सभी जांच के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया घटनास्थल का दौरा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को राजधानी में कमजोर इमारतों की पहचान करने और उन भवनों का संरचनात्मक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं, जहां निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है। उन्होंने सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली में पांच मंजिला इमारतों को तत्काल सील करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।