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नई दिल्ली/वाॅशिंगटन। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने वाला विधेयक कांग्रेस से पारित होने के बाद भारत ने कहा कि वह 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। टैरिफ अभी नहीं लगा, लेकिन खतरा बढ़ा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित किया। यह विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। विधेयक कानून बनने पर राष्ट्रपति को तय शर्तों के तहत ऐसा टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। ट्रंप राष्ट्रीय हित का हवाला देकर किसी देश को प्रतिबंध से छूट भी दे सकेंगे। भारत का जवाब- घटनाक्रम पर हमारी नजर भारत सरकार ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि उसने अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक पारित होने का संज्ञान लिया है और आगे के घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी जा रही है। नई दिल्ली ने संकेत दिया कि वह कानून के अंतिम स्वरूप और अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार करते हुए उसके संभावित आर्थिक एवं रणनीतिक प्रभाव का आकलन करेगी। ‘1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्रतिबद्धता’ भारत ने अपने जवाब में ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि देश के 1.4 अरब लोगों की जरूरत पूरी करने की उसकी प्रतिबद्धता अटल है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत विविध स्रोतों से ऊर्जा खरीदता रहेगा और उसके फैसले बदलती वैश्विक बाजार परिस्थितियों, उपलब्धता तथा राष्ट्रीय जरूरतों के आधार पर होंगे। व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए तैयार भारत नई दिल्ली ने कहा कि वह भारतीय व्यापार और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक उपाय करेगी। सरकार संभावित अमेरिकी कार्रवाई के प्रभाव से निपटने के लिए देश के व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। भारत का यह बयान साफ संकेत देता है कि मामला केवल तेल आयात तक सीमित नहीं रहेगा। संभावित टैरिफ का भारतीय निर्यात, उद्योग और अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता पर असर पड़ा तो सरकार जवाबी रणनीति तैयार करेगी। भारतीय पक्ष के अनुसार, हाल के महीनों में इस मुद्दे पर विभिन्न अमेरिकी वार्ताकारों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। भारत ने अमेरिका को स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रतिबंधों का असर केवल दोनों देशों के रिश्तों पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। किन देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ विधेयक के अनुसार, रूस से निकले कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पिछले 12 महीनों के पांच सबसे बड़े आयातक कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। इसके लिए एक प्रमुख शर्त यह होगी कि संबंधित देश कानून लागू होने के 30 दिन बाद भी जानबूझकर रूसी कच्चे तेल की नई खरीद करता रहे। रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों पर भी 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। कुछ देशों के लिए छूट का प्रावधान रूसी प्राकृतिक गैस का आयात उल्लेखनीय रूप से घटाने वाले देशों को प्रतिबंध से राहत मिल सकती है। जिन देशों की खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें भी छूट मिल सकती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय हित में प्रतिबंध माफ करने का अधिकार होगा। यही प्रावधान आगे भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। भारत पर पहले से अमेरिकी शुल्क का दबाव गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर पहले से लागू 25 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का एक और शुल्क घोषित कर चुका है। अमेरिकी वित्त विभाग ने केवल उन तेल खेपों के लिए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से रोका था, जो 11 मार्च 2026 से पहले रास्ते में थीं। नए विधेयक के कानून बनने पर भारत के लिए शुल्क का जोखिम और बढ़ सकता है। सीनेट में 86-11 से पारित हुआ था विधेयक अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को सात अगस्त को 86-11 मतों से मंजूरी दी थी। प्रतिनिधि सभा से पारित संस्करण इसी विधेयक का संशोधित रूप है। यह विधेयक यूक्रेन के प्रमुख समर्थक लिंडसे ग्राहम के नाम पर है, जिनका 11 जुलाई को अचानक निधन हो गया था। अमेरिका के भीतर भी टैरिफ शक्ति पर विरोध विधेयक को अमेरिका में भी सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला। डेमोक्रेट एलिजाबेथ वॉरेन, बर्नी सैंडर्स और रिपब्लिकन रैंड पॉल समेत कई सांसदों ने राष्ट्रपति को इतनी व्यापक टैरिफ शक्ति देने पर आपत्ति जताई। विरोध करने वाले सांसदों का कहना है कि इसका बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है और राष्ट्रपति सहयोगी देशों के खिलाफ भी इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। व्यापार समझौते की बातचीत के बीच नया तनाव यह विधेयक ऐसे समय पारित हुआ है, जब भारत और अमेरिका एक प्रारंभिक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। संभावित 100 प्रतिशत टैरिफ दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता को कठिन बना सकता है। भारत के लिए चुनौती ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात हितों के बीच संतुलन बनाने की होगी, जबकि अमेरिका को यह तय करना होगा कि रूस पर दबाव बढ़ाने की कोशिश में वह अपने महत्वपूर्ण साझेदार भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को कितना जोखिम में डालना चाहता है।