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नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विदेशी दबाव में शुल्क लागू करने के आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि यूपीआई के जरिये उधार आधारित लेनदेन की अनुमति केवल रूपे क्रेडिट कार्ड को दी गई है तथा चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर एमडीआर लगाने का उद्देश्य घरेलू कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कारोबार के अवसर बढ़ाना है। सभी यूपीआई भुगतानों पर नहीं लगेगा एमडीआर वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने साफ किया है कि एमडीआर की व्यवस्था सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू करने की बात नहीं है। इसे केवल कुछ चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले लेनदेन से जोड़ा गया है, ताकि यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके और अधिक घरेलू कंपनियां इसमें अपना कारोबार बढ़ा सकें। एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से भुगतान सेवा से जुड़ी संस्थाएं वसूलती हैं। यूपीआई क्रेडिट भुगतान में सिर्फ रूपे को मौका विभाग के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ( एनपीसीआई ) के 15 सितंबर 2026 के सर्कुलर में रूपे के अलावा किसी अन्य क्रेडिट कार्ड नेटवर्क को यूपीआई पर उधार आधारित लेनदेन की अनुमति नहीं दी गई है। सरकार की नीति स्पष्ट है कि यूपीआई से क्रेडिट कार्ड भुगतान की सुविधा फिलहाल केवल रूपे कार्ड के जरिये उपलब्ध होगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे भारतीय क्रेडिट कार्ड बाजार में रूपे की स्थिति और मजबूत होगी। डेबिट कार्ड पर एमडीआर से राहत बरकरार सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर एमडीआर समाप्त रखने की नीति जारी है। सरकार रूपे क्रेडिट और डेबिट कार्ड को एक मजबूत घरेलू भुगतान विकल्प के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य रूपे क्रेडिट कार्ड के विकास को गति देना और विदेशी कार्ड नेटवर्क पर निर्भरता घटाना है। विदेशी दबाव के आरोपों को बताया भ्रामक वित्तीय सेवा विभाग ने कहा, “यह आरोप कि एमडीआर किसी बाहरी प्रभाव के तहत लागू किया गया है, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।” सरकार का कहना है कि चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर एमडीआर लागू करना इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की संप्रभुता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे घरेलू कंपनियों को यूपीआई बाजार में विस्तार करने और बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा। अमेरिकी रिपोर्ट के आधार पर उठे थे सवाल विदेशी दबाव का आरोप लगाने वाले लोग अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी यूएसटीआर की 2026 की रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं। इस रिपोर्ट में अमेरिकी डिजिटल भुगतान कंपनियों को भारतीय यूपीआई व्यवस्था में समान कारोबारी अवसर नहीं मिलने की शिकायत की गई है। रिपोर्ट में विशेष रूप से यूपीआई पर रूपे क्रेडिट कार्ड के जरिये उधार आधारित भुगतान की सुविधा का उल्लेख किया गया है। अमेरिकी कंपनियों की शिकायत है कि उन्हें इस क्षेत्र में रूपे के बराबर अवसर नहीं मिल रहे हैं। 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा भी विवाद में यूएसटीआर की रिपोर्ट में नवंबर 2020 की उस घोषणा का भी जिक्र है, जिसके तहत एनपीसीआई ने थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप प्रदाताओं के लिए अधिकतम 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा निर्धारित की थी। यह सीमा दिसंबर 2026 से लागू होनी है। वित्तीय सेवा विभाग ने कहा कि जब यह सीमा घोषित की गई थी, तब यूपीआई बाजार में राजस्व अर्जित करने वाला आत्मनिर्भर मॉडल मौजूद नहीं था। ऐसे माहौल में केवल बाजार की अग्रणी कंपनियां ही प्रतिस्पर्धा में टिक सकती थीं। छोटी घरेलू कंपनियों के लिए खुलेगा रास्ता सरकार का तर्क है कि चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर एमडीआर लागू होने से यूपीआई व्यवस्था में आय का टिकाऊ मॉडल विकसित होगा। इससे छोटी घरेलू भुगतान कंपनियां भी बाजार की बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। विभाग ने स्पष्ट किया कि एमडीआर लागू करने का मूल उद्देश्य अधिक संख्या में भारतीय कंपनियों को डिजिटल भुगतान कारोबार में प्रवेश करने, टिकने और अपना विस्तार करने का अवसर देना है।



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