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मुंबई। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 1,733.67 अंक और निफ्टी में 499.60 अंक की भारी गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह में घरेलू शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों, अमेरिका तथा भारत के महंगाई आंकड़ों और कच्चे तेल की चाल से तय होगी। बीते सप्ताह ऊर्जा आधारित महंगाई की चिंता बाजार पर हावी रही। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और जवाबी कार्रवाई के बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा, जिससे निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता कमजोर हुई और भारतीय बाजार दबाव में आ गए। सेंसेक्स 1,733 अंक लुढ़का, निफ्टी में 500 अंक की गिरावट बीते सप्ताह घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 1,733.67 अंक यानी 2.27 प्रतिशत टूटकर शुक्रवार को 74,781.76 अंक प र बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 499.60 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट के साथ 23,398.10 अंक पर आ गया।बड़े शेयरों की तुलना में मझोली और छोटी कंपनियों पर दबाव कुछ कम रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.09 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.94 प्रतिशत नीचे आया। कच्चा तेल बना बाजार की सबसे बड़ी चिंता पिछले सप्ताह कच्चे तेल में आई बड़ी तेजी शेयर बाजार की गिरावट का प्रमुख कारण बनी। आने वाले सप्ताह में भी तेल की कीमतें बाजार के लिए सबसे अहम संकेतकों में शामिल रहेंगी। कच्चे तेल का ऊंचा भाव महंगाई की आशंका को बढ़ा रहा है। इसके साथ विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार में अस्थिरता को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है। 15 और 16 सितंबर को फेड की अहम बैठक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मुक्त बाजार समिति की बैठक 15 और 16 सितंबर को होगी। बैठक के बाद आने वाला बयान दुनिया के अन्य बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी असर डाल सकता है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक का आगे का रुख क्या रहने वाला है। वैश्विक स्तर पर एक साथ मौद्रिक सख्ती की बढ़ती उम्मीदों ने पहले ही पूंजी प्रवाह को लेकर चिंता बढ़ा दी है। महंगाई के घरेलू आंकड़ों पर भी रहेगी नजर भारत में खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े भी इसी सप्ताह जारी होने वाले हैं। निवेशकों के लिए ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि घरेलू स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कमजोर होते रुपये ने पहले ही बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है। अमेरिकी और घरेलू महंगाई के आंकड़े यह संकेत दे सकते हैं कि ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर आगे का माहौल कितना सख्त रह सकता है। बैंक ऑफ जापान भी बढ़ा सकता है हलचल फेड के साथ बैंक ऑफ जापान (बीओजे) का नीतिगत फैसला भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। बीओजे की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने और येन के मजबूत होने की उम्मीदों के बीच येन में कर्ज लेकर दूसरे बाजारों में निवेश करने वाले सौदों के पलटने की आशंका बढ़ी है। इसने उभरते बाजारों की ओर आने वाले पूंजी प्रवाह को लेकर निवेशकों की चिंता और गहरी कर दी है। सेंसेक्स की 30 में से 25 कंपनियां नुकसान में सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 25 के शेयर पिछले सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे अधिक नुकसान इंफोसिस को हुआ, जिसका शेयर 8.12 प्रतिशत टूट गया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 6.72 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 4.84 प्रतिशत, टीसीएस में 4.30 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 3.30 प्रतिशत की गिरावट रही। टाटा स्टील का शेयर 3.25 प्रतिशत, अल्ट्राटेक सीमेंट का 3.10 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक का 3.08 प्रतिशत नीचे आया। फार्मा से वित्तीय शेयरों तक दबाव सन फार्मा के शेयर में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बजाज फिनसर्व 2.72 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 2.48 प्रतिशत, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी 2.28 प्रतिशत तथा हिंदुस्तान यूनीलिवर 2.03 प्रतिशत टूटे। भारतीय स्टेट बैंक का शेयर 1.97 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा का 1.54 प्रतिशत, आईटीसी का 1.46 प्रतिशत, कोटक महिंद्रा बैंक का 1.45 प्रतिशत, ट्रेंट का 1.43 प्रतिशत और एलएंडटी का 1.29 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। एचडीएफसी बैंक में 0.72 प्रतिशत, भारती एयरटेल में 0.54 प्रतिशत, इंडिगो में 0.12 प्रतिशत और टाइटन में 0.10 प्रतिशत की गिरावट रही। गिरते बाजार में अडानी पोर्ट्स सबसे मजबूत चौतरफा दबाव के बीच सेंसेक्स की केवल कुछ कंपनियां बढ़त दर्ज कर सकीं। अडानी पोर्ट्स का शेयर सबसे अधिक 3.28 प्रतिशत चढ़ा। पावरग्रिड में 1.17 प्रतिशत, एनटीपीसी में 0.21 प्रतिशत और बीईएल में 0.07 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बड़े शेयर पिछड़े, रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर बढ़ा रुझान पिछले सप्ताह बड़े शेयरों का प्रदर्शन व्यापक बाजार से कमजोर रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप में अपेक्षाकृत कम गिरावट ने बाजार की कुल कमजोरी को कुछ हद तक संभाला। क्षेत्रवार कारोबार में निवेशकों का रुझान रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर जाता दिखाई दिया। स्वास्थ्य सेवा और फार्मा क्षेत्र बढ़त के मामले में आगे रहे। दूसरी ओर, ऊंची वैश्विक ब्याज दरों के माहौल से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में आया। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वित्तीय लागत ने रियल एस्टेट क्षेत्र को भी नीचे खींचा। आने वाला सप्ताह घटनाओं से भरा अगले सप्ताह का आर्थिक कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। अमेरिका और भारत के महंगाई आंकड़े, फेड और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले तथा कच्चे तेल की दिशा बाजार के लिए एक साथ कई बड़े संकेत लेकर आएंगे। ऊंची ऊर्जा कीमतें, विदेशी निवेश की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि, मजबूत घरेलू आर्थिक आधार और संस्थागत समर्थन निचले स्तरों पर खरीदारी को आकर्षित कर गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।



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