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सूरज कुमार सिंह मुंबई। अमेरिका-ईरान समझौते के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और छोटी तथा मझौली कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीददारी के दम पर बीते सप्ताह करीब 1.7 प्रतिशत की छलांग लगाने वाले घरेलू शेयर बाजार की अगले सप्ताह चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश रुख, मानसून की प्रगति तथा भारत और अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर नजर रहेगी। सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूत छलांग बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,274.95 अंक यानी 1.7 प्रतिशत चढ़कर 76,802.90 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 390.20 अंक की तेजी के साथ 24,013.10 अंक पर पहुंच गया और 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा। मिडकैप-स्मॉलकैप बने बाजार के स्टार बड़ी कंपनियों के मुकाबले निवेशकों का झुकाव मझौली और छोटी कंपनियों की ओर अधिक रहा। बीएसई मिडकैप सूचकांक 3.2 प्रतिशत उछलकर 16,753.20 अंक पर पहुंच गया, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 3.7 प्रतिशत मजबूत होकर 7,047.01 अंक पर बंद हुआ। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब व्यापक बाजार में भी बढ़ रहा है। कच्चे तेल ने दी तेजी की ताकत बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट रही। अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी। हालांकि, शांति वार्ता रद्द होने के बाद तेल कीमतों में गिरावट थम गई और सप्ताह के अंत में मुनाफावसूली देखने को मिली। रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स चमके, आईटी रहा कमजोर सेक्टोरल आधार पर रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर आईटी सेक्टर दबाव में रहा। इसकी प्रमुख वजह एक्सेंचर का कमजोर राजस्व अनुमान रहा, जिसने वैश्विक टेक्नोलॉजी खर्च को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दीं। ऊंची वैश्विक ब्याज दरें भी आईटी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। फेड और आरबीआई का सतर्क रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख बरकरार रखा है और भविष्य की नीति पर स्पष्ट संकेत देने से परहेज किया है। इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका मजबूत हुई है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक भी फिलहाल सावधानीपूर्ण रुख अपनाए हुए है। बाजार को उम्मीद है कि कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका-ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौतों में प्रगति से आने वाले महीनों में आर्थिक माहौल बेहतर हो सकता है। अगले सप्ताह किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर? विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' मोड में है। निवेशकों की निगाहें जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों, एफआईआई की खरीद-बिक्री, मानसून की स्थिति, भारत के पीएमआई और क्रेडिट ग्रोथ डेटा तथा अमेरिका के पीसीई मुद्रास्फीति और जीडीपी आंकड़ों पर रहेंगी। क्या कहते हैं विशेषज्ञ जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, भारत धीरे-धीरे टैरिफ अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव जैसी दो बड़ी चुनौतियों से बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। इससे बाजार के वैल्यूएशन में सुधार की संभावना बनी हुई है। हालांकि, बड़ी तेजी के लिए अमेरिका-ईरान समझौते और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर ठोस प्रगति जरूरी होगी। वहीं, मानसून, तिमाही नतीजे और एफआईआई की लगातार बिकवाली जैसे कारक निकट भविष्य में बाजार के लिए अहम चुनौती बने रह सकते हैं।



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