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पटना: बिहार में छुपी खेल प्रतिभाओं की पहचान, बेहतर प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार ने बिहार खेल नीति-2026 को मंजूरी दे दी है, जिसका लक्ष्य अलग-अलग खेल योजनाओं को एक व्यापक नीति के तहत जोड़कर प्रदेश को देश के अग्रणी खेल राज्यों में शामिल करना है। प्रतिभा खोजने से लेकर आगे बढ़ाने तक बनेगी व्यवस्था मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि नई खेल नीति का मुख्य उद्देश्य बिहार के युवाओं में छुपी खेल प्रतिभा को पहचानना और उसे सही प्रशिक्षण तथा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से पेशेवर मंच तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत और लगातार काम करने वाली व्यवस्था जरूरी है। इस नीति के जरिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया जाएगा। अलग-अलग योजनाओं को एक नीति में जोड़ा गया बिहार सरकार पहले से खेल क्षेत्र में कई योजनाएं चला रही है। इनमें नई खेल भर्ती नीति ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ , बिहार राज्य खेल छात्रवृत्ति योजना और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम ‘मशाल’ शामिल हैं। अब इन योजनाओं को खेल नीति-2026 के व्यापक ढांचे से जोड़कर लागू किया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को चयन से लेकर प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और नौकरी तक अलग-अलग स्तरों पर सहायता मिल सके। खेल ढांचे और प्रशिक्षण प्रणाली में होगा सुधार मंत्रिमंडल के निर्णय में माना गया है कि राज्य की मौजूदा खेल अवसंरचना और प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। नई नीति के तहत मैदानों, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ कोचिंग और बेहतर प्रतियोगी माहौल तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मिलेगा प्रोत्साहन ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ जैसी नीति को नए खेल ढांचे का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देकर उनका मनोबल बढ़ाना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे युवा खेल को केवल शौक नहीं, बल्कि सम्मानजनक करियर के रूप में भी अपनाएंगे। छात्रवृत्ति से खिलाड़ियों की आर्थिक मुश्किल होगी कम बिहार राज्य खेल छात्रवृत्ति योजना के जरिए उभरते खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था भी नई नीति का हिस्सा रहेगी। इससे प्रशिक्षण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने से जुड़े खर्च का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए यह सहायता विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। ‘मशाल’ कार्यक्रम से गांवों और छोटे शहरों की प्रतिभा पर नजर प्रतिभा पहचान कार्यक्रम ‘मशाल’ के माध्यम से गांव, कस्बों और छोटे शहरों में मौजूद खिलाड़ियों को खोजने पर जोर दिया जाएगा। इससे उन युवाओं को भी अवसर मिल सकेगा, जो संसाधनों की कमी के कारण बड़े प्रशिक्षण केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। सरकार का उद्देश्य प्रतिभा खोज को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि राज्य के हर हिस्से से खिलाड़ियों को सामने लाना है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर फोकस नई खेल नीति में खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ाकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि बिहार के खिलाड़ी केवल भागीदारी तक सीमित न रहें बल्कि बड़े मंचों पर पदक जीतें और राज्य की पहचान मजबूत करें।