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रांची। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा से जुड़े फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की जमानत याचिका आज अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। बचाव पक्ष की ओर से ठोस साक्ष्य नहीं होने की दलील दिए जाने के बावजूद अदालत ने सीआईडी के आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों पर गौर करते हुए श्री खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में ही रहना होगा। सुनवाई पूरी होने के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला श्री खियांग्ते की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई पूरी हुई थी। अदालत ने बचाव पक्ष और सीआईडी की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सीआईडी की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने श्री खियांग्ते के खिलाफ लगाए गए आरोपों का विरोध किया। श्री खियांग्ते अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि खियांग्ते के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। सीआईडी की छापेमारी के दौरान भी ऐसा कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या सामग्री बरामद नहीं हुई, जिससे यह साबित हो सके कि वह किसी आपराधिक साजिश में शामिल थे। बचाव पक्ष का कहना था कि केवल आरोपों के आधार पर उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए। सीआईडी का आरोप—ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम दिलाने में थी मुख्य भूमिका दूसरी ओर, सीआईडी ने अदालत के सामने अपनी जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री खियांग्ते की भूमिका को गंभीर बताया। जांच एजेंसी का आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी ट्रिपल डी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को जेपीएससी की परीक्षाएं आयोजित कराने का काम दिलाने में श्री एल खियांग्ते की मुख्य भूमिका थी। सीआईडी ने अदालत को बताया कि इस मामले में खियांग्ते के खिलाफ भारी कमीशन लेने का आरोप भी जांच के दौरान सामने आया है। साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश का भी आरोप सीआईडी ने अदालत को यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान साक्ष्य नष्ट करने की कथित कोशिशों से जुड़े तथ्य सामने आए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन्हीं तथ्यों के आधार पर एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। निजी कंपनी की भूमिका तक पहुंची जांच गौरतलब है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़ा यह मामला भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा संचालन में निजी एजेंसियों की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है। सीआईडी केवल पूर्व अधिकारियों की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रख रही है। मामले में निजी कंपनी के प्रतिनिधियों और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।