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मुंबई। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 08 मई के बाद का उच्चतम स्तर है और लगातार पांचवां सप्ताह है जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.35 अरब डॉलर रहा था। यानी सिर्फ एक सप्ताह में ही फॉरेक्स रिजर्व में 10 अरब डॉलर से ज्यादा की छलांग दर्ज की गई। लगातार पांचवें हफ्ते बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी लगातार पांचवें सप्ताह दर्ज की गई है। 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में कुल भंडार 692.866 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले सप्ताह के 682.35 अरब डॉलर के मुकाबले 10.512 अरब डॉलर अधिक है। यह बढ़त बताती है कि हाल के सप्ताहों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। स्वर्ण भंडार भी बढ़ा रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का स्वर्ण भंडार 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार के कुल आकार में सोने की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण होती है और इस सप्ताह इसमें भी मजबूत इजाफा दर्ज किया गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 8.75 अरब डॉलर का उछाल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 8.75 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 564.68 अरब डॉलर पर पहुंच गई। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के अलावा जापानी येन, ब्रितानी पाउंड और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के मूल्य का निर्धारण डॉलर के मुकाबले उनकी संदर्भ दर के आधार पर किया जाता है। आईएमएफ के पास आरक्षित निधि भी बढ़ी इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की आरक्षित निधि 2.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.778 अरब डॉलर हो गई। वहीं विशेष आहरण अधिकार 4.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.666 अरब डॉलर पर पहुंच गए। इस तरह विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग सभी प्रमुख घटकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। क्यों अहम है विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी? विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की बाहरी वित्तीय मजबूती का अहम संकेत माना जाता है। इसका इस्तेमाल आयात भुगतान, विदेशी कर्ज दायित्वों और मुद्रा बाजार में जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है। ऐसे में लगातार पांच सप्ताह से विदेशी मुद्रा भंडार का बढ़ना भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।