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कोच्चि। अगर आप कोई छोटा कारोबार चलाते हैं, दुकान, फैक्ट्री, वर्कशॉप, सर्विस सेंटर या कोई छोटा उद्योग (एमएसएमई) संचालित करते हैं और बैंक से लोन लेने में परेशानी होती है तो आपके लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि आने वाले समय में एमएसएमई को लोन लेना काफी आसान हो जाएगा। इसके लिए आरबीआई एक नई डिजिटल व्यवस्था यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) को बढ़ावा दे रहा है, जो उसी तरह काम करेगी जैसे यूपीआई ने पैसे भेजने और लेने का तरीका बदल दिया। आखिर एमएसएमई क्या होता है एमएसएमई का मतलब है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम। इसमें छोटी दुकानें, छोटे कारखाने, स्टार्टअप, सर्विस कंपनियां, ट्रांसपोर्ट कारोबार, कुटीर उद्योग और लाखों छोटे व्यवसाय शामिल होते हैं। यही सेक्टर देश में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करता है और करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है। छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है देश के लाखों छोटे कारोबारी अक्सर शिकायत करते हैं कि बैंक से लोन लेना आसान नहीं है। उन्हें बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और लोन मंजूर होने में काफी समय लग जाता है। कई बार कारोबार अच्छा होने के बावजूद जरूरी कागज पूरे नहीं होने के कारण लोन नहीं मिल पाता। अब यूएलआई क्या करेगा आरबीआई गवर्नर श्री मल्होत्रा ने यहां अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस (27 जून) पर पूरे सप्ताह के लिए आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन के मौके पर बताया कि यूएलआई यानी यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस इस पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है। आज अगर कोई व्यक्ति बैंक से लोन मांगता है तो बैंक उससे जीएसटी रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट, बिजली बिल, जमीन के कागज और कई दूसरे दस्तावेज मांगता है। यूएलआई आने के बाद यह सारी जानकारी कारोबारी की अनुमति मिलने पर डिजिटल तरीके से एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी। इससे बैंक को अलग-अलग जगह से जानकारी जुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लोन का फैसला बहुत तेजी से हो सकेगा। UPI की तरह समझिए यूएलआई को जिस तरह पहले पैसे भेजने के लिए बैंक जाना पड़ता था, फॉर्म भरना पड़ता था और कई दिन लग जाते थे लेकिन यूपीआई आने के बाद मोबाइल से कुछ सेकंड में पैसा ट्रांसफर होने लगा। ठीक उसी तरह आरबीआई का मानना है कि यूएलआई आने के बाद लोन लेने की प्रक्रिया भी तेज, आसान और डिजिटल हो जाएगी। एमएसएमई को कितना लोन मिल रहा है आरबीआई गवर्नर ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक बैंकों ने एमएसएमई क्षेत्र को 36.79 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। पिछले पांच वर्षों में एमएसएमई को मिलने वाले कर्ज में हर साल औसतन करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि आरबीआई मानता है कि अभी भी कई छोटे कारोबारियों तक पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं पहुंच पाई है और इस दिशा में अभी काफी काम बाकी है। देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का कितना योगदान है श्री मल्होत्रा ने बताया कि एमएसएमई केवल छोटे कारोबार नहीं हैं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। भारत के जीडीपी में लगभग 31% योगदान देश के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) उत्पादन में 35% हिस्सेदारी कुल माल निर्यात में लगभग 50% योगदान 32 करोड़ से ज्यादा लोगों की आजीविका का आधार। यही वजह है कि सरकार और आरबीआई इस सेक्टर को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। क्या कहा RBI गवर्नर ने श्री मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि आरबीआई एमएसएमई क्षेत्र के लिए जरूरी वित्तीय ढांचा तैयार करता रहेगा, प्रक्रियाओं को और आसान बनाएगा तथा छोटे कारोबारियों की तरक्की में हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहेगा।



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