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नई दिल्ली। रिफाइनरी उत्पादों, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट के चलते देश के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) की वृद्धि दर मई में घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई, जो सात महीने का निचला स्तर है वहीं इस दौरान बिजली, इस्पात और सीमेंट क्षेत्रों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 1.8 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल मई में यह 1.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मई में उत्पादन वृद्धि की रफ्तार कमजोर पड़ने से औद्योगिक गतिविधियों की गति को लेकर नई चिंता उभर सकती है। ऊर्जा सेक्टर की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव कोर सेक्टर में सबसे अधिक 28 प्रतिशत भारांश रखने वाले रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन मई में 8.7 प्रतिशत घट गया। इसके अलावा प्राकृतिक गैस उत्पादन में 4.9 प्रतिशत और कच्चे तेल के उत्पादन में 4.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कोयला उत्पादन भी 9.3 प्रतिशत घटा, जबकि उर्वरक उत्पादन में 0.9 प्रतिशत की गिरावट रही। बिजली, इस्पात और सीमेंट बने सहारा हालांकि कुछ क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन कर गिरावट के असर को सीमित करने की कोशिश की। मई में बिजली उत्पादन 8.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि इस्पात उत्पादन में 5 प्रतिशत और सीमेंट उत्पादन में 8.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इससे निर्माण और बुनियादी ढांचा गतिविधियों में मांग बनी रहने के संकेत मिलते हैं। दो महीनों का प्रदर्शन स्थिर, लेकिन चुनौतियां बरकरार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई के दौरान कोर सेक्टर की औसत वृद्धि दर 1.1 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के बराबर है। इस दौरान बिजली उत्पादन 7.1 प्रतिशत, इस्पात उत्पादन 5.2 प्रतिशत और सीमेंट उत्पादन 8.3 प्रतिशत बढ़ा। दूसरी ओर रिफाइनरी उत्पादन 4.7 प्रतिशत, कोयला उत्पादन 9.1 प्रतिशत और कच्चे तेल का उत्पादन 4.2 प्रतिशत घटा। प्राकृतिक गैस और उर्वरक उत्पादन में भी 4.5-4.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्या है इसका आर्थिक मतलब कोर सेक्टर देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तय करता है। ऐसे में इसकी धीमी वृद्धि भविष्य के औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव का संकेत मानी जाती है। हालांकि बिजली, इस्पात और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण गतिविधियां अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई हैं।