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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महादेव ऐप सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध ऑनलाइन बेटिंग मामले में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सहित कई आरोपियों के खिलाफ कुल छह चार्जशीट दाखिल करते हुए दावा किया है कि देश के सबसे बड़े अवैध बेटिंग सिंडिकेट्स में शामिल इस नेटवर्क के जरिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों यूजर्स तक पहुंच बनाकर अवैध सट्टेबाजी, हवाला और धनशोधन का बड़ा खेल चलाया गया। देश के सबसे बड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक होने का दावा सीबीआई ने गुरुवार को बताया कि महादेव ऐप को देश के सबसे बड़े अवैध बेटिंग सिंडिकेट्स में से एक है। एजेंसी का आरोप है कि यह नेटवर्क भारत के बाहर से चलाया जा रहा था लेकिन इसका जाल देशभर में फैला हुआ था। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए लाखों लोगों तक इसकी पहुंच बनाई गई और उनके जरिए सट्टेबाजी का बड़ा कारोबार खड़ा किया गया। सीबीआई ने कितनी चार्जशीट दाखिल कीं सीबीआई के मुताबिक, उसने इस पूरे मामले में दो अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई की है। पहली चार्जशीट महादेव ऐप से जुड़े भ्रष्टाचार केस में दाखिल की गई है जबकि दूसरी तरफ 5 चार्जशीट दूसरे महादेव ऐप मामले में दाखिल की गई हैं। इस तरह कुल 6 चार्जशीट के जरिए एजेंसी ने अदालत के सामने अपनी शुरुआती जांच और सबूत पेश कर दिए हैं। भ्रष्टाचार वाले केस में कौन-कौन आरोपी हैं सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इनमें शुभम साहू, रोहित यदु, विकास छपारिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा जैसे नाम शामिल हैं। एजेंसी ने इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी जैसी धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। सीबीआई ने यह भी कहा है कि उसने इस केस में कथित मुख्य सरगनाओं सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त सबूत अदालत में दाखिल किए हैं। दूसरे महादेव ऐप केस में क्या कार्रवाई हुई? सीबीआई के मुताबिक, दूसरे महादेव ऐप मामले में 66 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट दाखिल की गई हैं। इनमें सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को मुख्य आरोपी के तौर पर पेश किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि बेटिंग सिंडिकेट के कई पैनल्स के जरिए सट्टेबाजी से आने वाला पैसा इन्हीं चैनलों से होकर गुजरता था और इसी नेटवर्क के जरिए उसे आगे घुमाया जाता था। मोबाइल ऐप के जरिए सट्टा, फिर पैसा कई रास्तों से बाहर अगर इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो सीबीआई का आरोप है कि महादेव ऐप और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा चलाया गया। इस नेटवर्क से जुड़ने वाले लोगों का पैसा अलग-अलग खातों और चैनलों में घुमाया गया। एजेंसी का कहना है कि इसी अवैध कमाई को बाद में कई परतों में बांटकर छिपाने की कोशिश की गई और उसका कुछ हिस्सा सरकारी अधिकारियों तक “प्रोटेक्शन मनी” यानी संरक्षण के लिए पहुंचाया गया। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर शिकंजा क्यों सीबीआई ने सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस पूरे नेटवर्क के बड़े चेहरों के रूप में पेश किया है। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप का नेटवर्क भारत से बाहर बैठकर चलाया जा रहा था और इसका संचालन कई देशों से किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के प्रमोटर और उनके सहयोगी कई साल पहले भारत छोड़कर एशियाई देशों में बस गए थे और वहीं से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। विदेश भागे आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई सीबीआई ने बताया है कि इस मामले में 4 मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा एजेंसी ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका मतलब यह है कि अब जांच सिर्फ देश के भीतर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जा सके। सीबीआई की जांच में अब तक क्या सामने आया सीबीआई का दावा है कि जांच में यह सामने आया है कि महादेव ऐप नेटवर्क ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच बनाई। इसके जरिए ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग मार्केट चलाए गए। इस पूरे नेटवर्क से अवैध मुनाफा कमाया गया और बाद में इस पैसे को कई खातों और चैनलों के जरिए घुमाकर उसकी असली परतें छिपाने की कोशिश की गई। एजेंसी का यह भी आरोप है कि इसी पैसे का एक हिस्सा सार्वजनिक सेवकों तक पहुंचाया गया। सीबीआई आगे क्या करने वाली है सीबीआई ने साफ कहा है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है। एजेंसी अभी भी इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने, इसके राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण की परतें खोलने और बाकी आरोपियों को कानून के दायरे में लाने में जुटी हुई है। CBI का कहना है कि आने वाले समय में इस मामले में और चार्जशीट दाखिल की जाएंगी।



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