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मुंबई। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और बॉन्ड यील्ड में मजबूती के कारण बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अब निवेशकों की नजर अमेरिका में जारी होने वाले महंगाई और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों पर टिकी है, जो वैश्विक ब्याज दरों की आगे की दिशा तय कर सकते हैं। सेंसेक्स 468 अंक टूटा, 78 हजार के नीचे बंद बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 468.42 अंक यानी 0.60 प्रतिशत गिरकर शुक्रवार को 77,540.83 अंक पर बंद हुआ। इसके साथ ही सेंसेक्स 78 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 114 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 24,252 अंक पर आ गया। दिग्गज शेयरों में दबाव, मझौली और छोटी कंपनियों ने दिया सहारा बाजार की बड़ी कंपनियों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी बनी रही। इससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही। बीएसई मिडकैप-150 सूचकांक 0.04 प्रतिशत बढ़कर 17,282.07 अंक पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप-250 सूचकांक 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,242.51 अंक पर पहुंच गया। कच्चे तेल ने बढ़ाई महंगाई की चिंता पूरे सप्ताह बाजार पर बढ़ते कच्चे तेल और मजबूत वैश्विक बॉन्ड यील्ड का असर दिखाई दिया। तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से आयातित महंगाई की चिंता बढ़ी और निवेशकों ने जोखिम लेने से दूरी बनाई। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल आयात बिल, रुपये और महंगाई—तीनों पर दबाव बढ़ा सकता है। फेड मिनट्स से पहले आई तेज गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण जारी होने से पहले सप्ताह के बीच में बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों को आशंका थी कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि सप्ताह के अंतिम हिस्से में वित्तीय शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया, जिससे शुरुआती नुकसान का एक हिस्सा कम हो गया। सोना बना सुरक्षित निवेशकों की पसंद अनिश्चित माहौल में सोना बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रमुख परिसंपत्तियों में शामिल रहा। बढ़ती महंगाई और वैश्विक जोखिमों से बचाव के लिए निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया। सोने को आम तौर पर सुरक्षित निवेश और महंगाई से बचाव के साधन के रूप में देखा जाता है, इसलिए बाजार में अस्थिरता बढ़ने पर इसकी मांग भी मजबूत हुई। रियल्टी, मेटल और निजी बैंकों में खरीददारी सेक्टरों के लिहाज से रियल्टी, मेटल और निजी बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। कमोडिटी कीमतों में मजबूती, बेहतर ऋण वृद्धि और हालिया गिरावट के बाद आकर्षक मूल्यांकन ने इन क्षेत्रों को समर्थन दिया। इसके विपरीत आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर दबाव रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च को लेकर चिंता और बढ़ती लागत ने निवेशकों को इन क्षेत्रों में सतर्क बनाए रखा। स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती प्रमुख सूचकांकों की कमजोरी के बीच स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। घरेलू बाजार पर अधिक निर्भरता और आय में सुधार की संभावना ने छोटे शेयरों में निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। यह रुझान बताता है कि निवेशक पूरे बाजार से दूरी नहीं बना रहे, बल्कि चुनिंदा शेयरों और क्षेत्रों में अवसर तलाश रहे हैं। अमेरिकी आंकड़े तय करेंगे अगले सप्ताह की चाल अगले सप्ताह अमेरिका में जारी होने वाले महंगाई और जीडीपी के आंकड़े बाजार के लिए सबसे अहम संकेत होंगे। इन आंकड़ों से यह अनुमान लगेगा कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर आगे कितना सख्त या नरम रुख अपना सकता है।महंगाई उम्मीद से अधिक रही तो बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत हो सकते हैं, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ेगा। वहीं कमजोर आंकड़े ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद जगाकर शेयर बाजारों को राहत दे सकते हैं। निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय बाजार के सामने फिलहाल महंगा कच्चा तेल, ऊंची वैश्विक ब्याज दरें और विदेशी संकेत सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। दूसरी ओर घरेलू आर्थिक मजबूती और चुनिंदा क्षेत्रों में आकर्षक मूल्यांकन बाजार को सहारा दे रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी आंकड़ों, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से तय होने की संभावना है।