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न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा सामना करने के बावजूद फैसले लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों के पीछे रहने का मुद्दा उठाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि जिन मुद्दों से इन देशों का भविष्य जुड़ा है, उन पर निर्णय लेने वाली वैश्विक संस्थाओं में भी उन्हें उचित जगह मिलनी चाहिए। विकासशील देशों की एकजुटता जरूरी श्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा से इतर “समान विचार वाले विकासशील देशों और मित्र देशों की उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक” को मंगलवार को संबोधित करते हुए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विकासशील देशों की एकजुटता को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संकटों का प्रभाव विकासशील देशों पर ज्यादा पड़ रहा है, इसलिए उनकी चिंताओं और प्राथमिकताओं को फैसले लेने की प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सप्लाई चेन से खाद्य सुरक्षा तक उठाए मुद्दे विदेश मंत्री ने आपूर्ति श्रृंखला, वित्त और कनेक्टिविटी में आने वाली रुकावटों को स्वीकार न करने की जरूरत बताई। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया। एआई न पैदा करे नई असमानता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच श्री जयशंकर ने इससे पैदा होने वाली नई असमानताओं को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने विकासशील देशों के बीच स्वदेशी एआई टूल और फ्रेमवर्क साझा करने की वकालत की और कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव-केंद्रित बनी रहे। आर्थिक सहयोग बने संकटों के खिलाफ ढाल विदेश मंत्री ने वैश्विक संकटों के असर से विकासशील देशों को बचाने के लिए आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि कि विकासशील देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग बाहरी संकटों के प्रभाव से निपटने में मददगार साबित हो सकता है। जलवायु कार्रवाई में आत्मनिर्भरता पर जोर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर श्री जयशंकर ने केवल ‘ग्लोबल नॉर्थ’ पर निर्भर रहने के बजाय विकासशील देशों को अपने स्तर पर सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मंचों के जरिए जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र में सुधार भी जरूरी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत भी रेखांकित की। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए वैश्विक संस्थाओं में बदलाव जरूरी है, ताकि निर्णय प्रक्रिया में उनकी आवाज और भागीदारी मजबूत हो सके। जयशंकर ने दिए ये पांच सुझाव 1. वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठे आवाज मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मंचों का प्रभावी इस्तेमाल कर विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा जाए, ताकि उन्हें नजरअंदाज न किया जा सके। 2. आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ाएं वैश्विक संकटों के प्रभाव से खुद को सुरक्षित रखने के लिए विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत किया जाए। 3. स्वदेशी AI तकनीक करें साझा विकासशील देश अपने बनाए एआई उपकरण और तकनीक एक-दूसरे के साथ साझा करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानव-केंद्रित बनाए रखना सुनिश्चित करें। 4. जलवायु कार्रवाई में बढ़ाएं अपनी ताकत जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए केवल ग्लोबल नॉर्थ पर निर्भर रहने के बजाय इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसे मंचों के जरिए विकासशील देश आपसी सहयोग बढ़ाएं। 5. यूएन और बहुपक्षीय व्यवस्था में हो सुधार विकासशील देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को उचित जगह देने के लिए संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार किया जाए।



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