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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज थाना क्षेत्र में ठगी के एक मामले की छापेमारी के दौरान बरामद रकम में हेरफेर कर तीन लाख रुपये गायब करने के आरोप में विभागीय जांच में दोषी पाए गए चार सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मामला गोविंदगंज थाना क्षेत्र में दर्ज जालसाजी और ठगी के एक केस से जुड़ा है। रढिया गांव में अमरेश पांडेय के घर पर जौनपुर, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद गौतम से कथित तौर पर 19 लाख रुपये, दो मोबाइल और एक सोने की चेन छीन लिये जाने के मामले में गोविंदगंज थाना कांड संख्या 280/2025 दर्ज किया गया था। छापेमारी में 4.15 लाख रुपये समेत सोने जैसे सामान बरामद मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और सामान की बरामदगी के लिए गठित पुलिस टीम ने 21 नवंबर 2025 की रात प्राथमिक अभियुक्त चंदन सिंह के घर पर छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, छापेमारी में 4.15 लाख रुपये नकद, 10 सोने जैसे बिस्किट और एक सोने जैसी चेन बरामद हुई। पुलिस विज्ञप्ति में आरोप है कि छापेमारी दल में शामिल चार सिपाहियों ने बरामद रकम में से कुछ रुपये निकालकर आपस में बांट लिये और तीन लाख रुपये गायब कर दिये। बाद में पूछताछ और जांच के दौरान उक्त रकम बरामद की गयी। मामला दर्ज, चारों सिपाही गिरफ्तार आरोप सामने आने के बाद चारों सिपाहियों, सिपाही 940 संतोष कुमार, सिपाही 672 गौतम कुमार यादव, सिपाही 633 कृष्ण कुमार और सिपाही 14 ओमप्रकाश के खिलाफ साहेबगंज थाना, मुजफ्फरपुर में कांड संख्या 691/2025 दर्ज किया गया। मामले में धारा 303(2)/317(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई करते हुए चारों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विभागीय जांच में भी आरोप सही पाए गए पुलिस विभाग ने आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ चारों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट में चारों सिपाहियों को कर्तव्य के प्रति पूर्णतः लापरवाही और मनमानेपन का दोषी पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्ट आचरण और नैतिक अक्षमता से जुड़े आरोपों को गंभीर माना गया। इसके बाद संबंधित सेवा नियमों के तहत चारों सिपाहियों को पूस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने तत्काल प्रभाव से पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। बरामदगी अभियान में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी कड़ा संदेश इस कार्रवाई से विभाग ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि आपराधिक मामलों में बरामदगी और छापेमारी जैसे संवेदनशील अभियानों के दौरान पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। मामले में आपराधिक मुकदमे के साथ विभागीय जांच पूरी कर सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की गयी है। एक ठगी के मामले में आरोपियों की तलाश के लिए हुई छापेमारी अब खुद पुलिसकर्मियों की जवाबदेही का मामला बन गयी। बरामद रकम में कथित हेरफेर के आरोप के बाद विभागीय जांच हुई और अंततः चार सिपाहियों की पुलिस सेवा समाप्त कर दी गयी।



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