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पटना। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान 1.10 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई, 1.31 लाख लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाला गया और प्रेस सहित लोकतांत्रिक संस्थाओं का दमन कर संविधान की हत्या की गई, इसलिए कांग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने से पहले देश से माफी मांगनी चाहिए। श्री नड्डा ने गुरुवार को यहां आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में आपातकाल के दौर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर लोकतंत्र की हत्या, नागरिक अधिकारों के दमन और संविधान को कुचलने का आरोप लगाय और कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन था, जब सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया था।उन्होंने सबसे ज्यादा जोर आपातकाल के दौरान हुई जबरन नसबंदी, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों, प्रेस सेंसरशिप और संविधान में किए गए संशोधनों पर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज संविधान बचाने की बात करती है लेकिन देश को यह नहीं भूलना चाहिए कि संविधान और लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला उसी पार्टी ने किया था। '1.10 करोड़ नसबंदी, गांवों से भागते थे नौजवान' भाजपा नेता ने अपने भाषण में स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान 1 करोड़ 10 लाख लोगों की नसबंदी कराई गई , जिनमें से लगभग 80 लाख नसबंदी केवल 1975-76 के दौरान हुई। उन्होंने इसे मानवाधिकारों पर सबसे बड़ा हमला बताया और कहा कि उस दौर में गांवों में डॉक्टरों की गाड़ी पहुंचते ही युवा खेतों और जंगलों की ओर भाग जाते थे क्योंकि लोगों में जबरन नसबंदी का भय था। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी अभियान नहीं था बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का ऐसा उदाहरण था जिसने आम नागरिकों की स्वतंत्रता तक छीन ली। '1.31 लाख लोग जेल भेजे गए, प्रेस की आवाज दबा दी गई' भाजपा नेता ने कहा कि आपातकाल के दौरान 1 लाख 31 हजार से ज्यादा लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अंग्रेजी शासन में भी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां नहीं हुई थीं।उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 300 से अधिक पत्रकारों को जेल भेजा गया , अखबारों पर सेंसरशिप लागू कर दी गई और कई अखबारों के पन्ने लगभग खाली छपते थे क्योंकि सरकार की अनुमति के बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता था। 'दिल्ली में मकान तोड़े गए, लाखों लोग बेघर हुए' श्री नड्डा ने कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक विरोधियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में करीब 1 लाख 500 मकानों को ढहा दिया गया , जिससे लगभग 7 लाख लोग बेघर हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में आम नागरिकों के अधिकारों को पूरी तरह कुचल दिया गया। पटना और जेपी आंदोलन को बताया लोकतंत्र की लड़ाई की जन्मभूमि केंद्रीय मंत्री ने बिहार और विशेष रूप से पटना को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई का केंद्र बताया और कहा कि गांधी मैदान से शुरू हुआ लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन ही आगे चलकर पूरे देश में तानाशाही के खिलाफ जनआंदोलन बना। उन्होंने बताया कि वे स्वयं छात्र जीवन में जेपी आंदोलन से जुड़े थे और 5 जून 1974 के आंदोलन के प्रत्यक्ष गवाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। राहुल गांधी पर सीधा हमला श्री नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने से पहले राहुल गांधी को अपनी दादी इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने न्यायपालिका, प्रेस और नागरिक अधिकारों को कुचल दिया था, वही आज खुद को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक बताने की कोशिश कर रही है। राष्ट्रपति शासन और 42वें संशोधन का भी किया जिक्र भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आपातकाल के दौरान 42वां संविधान संशोधन लाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से बाहर करने का प्रयास किया गया और सांसदों का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के शासनकाल में कई बार राष्ट्रपति शासन लगाकर चुनी हुई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ऐसी प्रवृत्ति नहीं दिखी। 'कांग्रेस की सोच आज भी नहीं बदली' श्री नड्डा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक सोच आज भी वही है, जो आपातकाल के समय थी। उन्होंने विपक्षी दलों के गठबंधन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता की राजनीति के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता करना कांग्रेस की पुरानी प्रवृत्ति रही है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए आपातकाल की घटनाओं को हमेशा याद रखना होगा ताकि भविष्य में कोई भी सरकार संविधान और नागरिक अधिकारों के साथ ऐसा व्यवहार करने का साहस न कर सके।



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