Full Story

फगवाड़ा। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में एक छात्रा से कथित दुष्कर्म के आरोप को लेकर छात्रों का विरोध उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने फगवाड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-44 जाम कर दिया जबकि पुलिस से झड़प, लाठीचार्ज और वाहनों में आगजनी के बीच अज्ञात लोगों के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को झूठा और भ्रामक बताते हुए खारिज किया है। तीन दिन पुरानी कथित घटना के आरोप से भड़का गुस्सा विवाद की शुरुआत उस आरोप से हुई, जिसमें छात्रों ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी के जीएच-3 हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ तीन दिन पहले एक प्लंबर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। छात्रों का आरोप था कि मामले में अब तक कार्रवाई नहीं की गई। जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला के अनुसार, छात्रों का कहना है कि संबंधित छात्रा इसके बाद अपने घर लौट गई। हालांकि, यह छात्रों का आरोप है और विश्वविद्यालय ने इसे स्पष्ट रूप से नकारा है। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, जांच के लिए एसआईटी गठित मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने छात्रों के आरोपों के आधार पर कार्रवाई शुरू की। अज्ञात लोगों के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप वाली एफआईआर दर्ज की गई है और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। पुलिस कार्रवाई और एलपीयू के कुलपति जसपाल सिंह संधू के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारी रविवार को पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। आंदोलन कैंपस से निकलकर एनएच-44 तक पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने फगवाड़ा के पास राजमार्ग जाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। छात्रों की मांग थी कि विश्वविद्यालय के संस्थापक-कुलाधिपति और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल खुद प्रदर्शन स्थल पर आएं और मामले में कार्रवाई का व्यक्तिगत रूप से भरोसा दें। शाम होते-होते हालात बिगड़े, पुलिस-छात्र आमने-सामने रविवार शाम स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की तरफ बोतलें और पत्थर फेंकने का आरोप लगा। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। फिर हालात और बिगड़ गए और कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई। जालंधर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह विर्क के मुताबिक, घटना में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, पुलिस अधीक्षक (जांच) हरिंदर गिल ने बताया कि बीती रात से स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दी हैं, जिसके बाद छात्र रात से ही कैंपस छोड़कर जा रहे हैं। फिलहाल किसी तरह का विरोध-प्रदर्शन नहीं हो रहा है। एहतियात के तौर पर कैंपस के सभी गेटों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कैंपस के अंदर भी तोड़फोड़, सोशल मीडिया पर आए वीडियो इससे पहले सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी कैंपस के भीतर तोड़फोड़ करते दिखाई दिए। इनमें से कुछ लोगों ने अपने चेहरे रूमाल से ढक रखे थे। प्रदर्शन के दौरान खिड़कियों के शीशे और गमले तोड़े जाने तथा कुछ वस्तुओं में आग लगाने की बात भी सामने आई। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एलपीयू ने कहा- कैंपस में दुष्कर्म का आरोप सही नहीं जहां प्रदर्शनकारी गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं एलपीयू प्रशासन ने कैंपस में दुष्कर्म के आरोप को खारिज कर दिया। एलपीयू की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही बातें झूठी और भ्रामक हैं तथा इन्हें शरारती तत्वों ने फैलाया है। विश्वविद्यालय ने अपने पक्ष के समर्थन में एक वीडियो बयान भी जारी किया। जीएच-3 के कमरा नंबर 504 की तीन छात्राओं का वीडियो एलपीयू की ओर से जारी वीडियो में जीएच-3 हॉस्टल के कमरा नंबर 504 की तीन छात्राएं दिखाई गईं। उन छात्राओं ने दावा किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई और वे पिछले दो महीने से वहां रह रही हैं। रात करीब 1:45 बजे पुलिस को मिली छात्रों के जुटने की सूचना पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस को रात करीब 1:45 बजे सूचना मिली कि एलपीयू कैंपस में छात्र इकट्ठा हो रहे हैं और सड़क जाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस को पता चला कि यह जमावड़ा अफवाहों के कारण हुआ था। पुलिस ने उन छात्रों से भी बातचीत की, जिनकी एलपीयू प्रशासन से शिकायतें थीं, और उन शिकायतों का समाधान कराने की दिशा में काम करने की बात कही। स्थिति नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।