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पटना। बिहार के गांवों में नया टैक्स (कर) लगाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में आज विधानसभा में विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विधानसभा में मंगलवार को भोजनावकाश से पहले की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गए और प्रस्तावित टैक्स व्यवस्था को वापस लेने की मांग करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया और कहा कि सरकार ने उनकी चिंता का संज्ञान लिया है। इसके बावजूद हंगामा जारी रहा। इस बीच शून्यकाल की कार्यवाही शुरू की गई। हालांकि बाद में विपक्षी सदस्य अपनी-अपनी सीट पर लौट गए। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी नए कर को लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यदि कोई नया टैक्स लागू करना चाहती है तो उसे पहले विधेयक के रूप में सदन में लाना होगा। इस पर सभी सदस्य चर्चा करेंगे, संशोधन प्रस्ताव रख सकेंगे और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन चाहे तो ऐसे किसी प्रस्ताव को अस्वीकार भी कर सकता है इसलिए यह कहना कि सरकार सीधे नया टैक्स लागू कर देगी, सही नहीं है। इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के विधायक संदीप सौरभ ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए ग्राम पंचायत टैक्स एवं शुल्क नियमावली-2026 का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस नियमावली को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स सहित कई नए शुल्क लगाने का रास्ता खुल गया है। श्री सौरभ ने दावा किया कि प्रस्तावित नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को आवासीय मकानों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, पेट्रोल पंपों, विवाह भवनों, ईंट-भट्ठों समेत अन्य संपत्तियों पर कर लगाने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा सफाई और पेयजल जैसी सेवाओं के लिए भी शुल्क वसूला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट और घटती आय से जूझ रहे ग्रामीण परिवारों पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है, ऐसे में नए कर लगाने का प्रस्ताव ग्रामीण जनता के हित में नहीं है। विपक्ष ने सरकार से प्रस्तावित टैक्स व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि किसी भी नए कर पर अंतिम फैसला विधानसभा में चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।