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भागलपुर। देश के सबसे अनोखे चुनावी योद्धाओं में गिने जाने वाले और ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर भागलपुर निवासी नागरमल बाजोरिया का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया और शुक्रवार को भागलपुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक सफर में 280 से अधिक चुनाव लड़ने वाले बाजोरिया ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर संजय गांधी तथा लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर अलग पहचान बनाई थी। पटना के अस्पताल में ली अंतिम सांस नागरमल बाजोरिया लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर भागलपुर पहुंचा, जहां शोकाकुल परिजनों के साथ गणमान्य लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। 280 से ज्यादा चुनाव लड़कर बने ‘धरती पकड़’ बाजोरिया की सबसे बड़ी पहचान उनका चुनावी सफर रहा। उन्होंने अपने जीवनकाल में 280 से अधिक चुनाव लड़े । बार-बार चुनावी मैदान में उतरने की इसी खासियत ने उन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर कर दिया। उनका चुनाव लड़ना केवल जीत-हार तक सीमित नहीं था। परिजनों के मुताबिक, वह चुनावों के जरिए आम लोगों को यह संदेश देना चाहते थे कि लोकतंत्र में एक सामान्य व्यक्ति भी देश के बड़े से बड़े नेता के सामने खड़ा हो सकता है। इंदिरा गांधी से रायबरेली, राजीव गांधी से अमेठी में मुकाबला उनका चुनावी सफर कई बड़े राजनीतिक नामों से जुड़ा रहा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली और राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा था। इसके अलावा वह अटल बिहारी वाजपेयी, संजय गांधी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ भी चुनावी मैदान में उतरे। यही वजह थी कि चुनाव जीतने से ज्यादा उनका चुनाव लड़ने का अंदाज और बड़े नेताओं को चुनौती देने का जज्बा उनकी पहचान बन गया। राष्ट्रपति चुनाव तक पहुंची चुनाव लड़ने की जिद श्री बाजोरिया का चुनावी सफर सिर्फ लोकसभा या विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के चुनाव में भी अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश की। उन्होंने 1969 में वी.वी. गिरि के खिलाफ राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था । कई दशक बाद 2012 में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल किया , हालांकि उस समय उनका नामांकन खारिज हो गया था। गधों के साथ निकाली रैली, भ्रष्टाचार के खिलाफ दिया संदेश श्री बाजोरिया का चुनाव प्रचार भी उतना ही अनोखा था जितना उनका चुनावी सफर। 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश देने के लिए गधों के साथ रैली निकाली थी। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान वह हाथ में घड़ी-घंटा लेकर चलते थे। उनके प्रचार के इन अनोखे तरीकों ने उन्हें आम चुनावी उम्मीदवारों से बिल्कुल अलग पहचान दी। लाहौर में जन्म, विभाजन से पहले भागलपुर आया परिवार श्री नागरमल बाजोरिया का जन्म 1930 में लाहौर में हुआ था। देश के विभाजन से पहले उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था और इसके बाद यह शहर उनकी जिंदगी और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। राजनीतिक मैदान में अपनी अलग छाप छोड़ने के साथ बाजोरिया सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे। उनकी जिंदगी का दूसरा पहलू समाज सेवा से जुड़ा था। उन्होंने कई स्थानों पर अपने खर्च से हैंडपंप लगवाए , ताकि लोगों को पानी की सुविधा मिल सके। इसके अलावा वह गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक मदद भी करते थे। इस तरह चुनावी मैदान में बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों को चुनौती देने वाले बाजोरिया जमीन पर जरूरतमंद लोगों की मदद से भी जुड़े रहे। 2019 में लड़ा जिंदगी का आखिरी चुनाव श्री बाजोरिया ने अपना आखिरी चुनाव 2019 में लड़ा था। इसके साथ दशकों तक चला उनका अनोखा चुनावी सफर अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचा। 280 से अधिक चुनाव, देश के कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ उम्मीदवारी, राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन और प्रचार के अनोखे तरीके—इन सबने नागरमल बाजोरिया को भारतीय चुनावी राजनीति में एक अलग पहचान दी।