Full Story

पटना: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई बिहार विधान परिषद की सीट पर मनोनीत कर दिया है, जिससे उनका मंत्री पद अब संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले बदली तस्वीर श्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद (एमएलसी) बनना इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि वह अब तक विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। इसके बावजूद वह पहले श्री नीतीश कुमार और फिर श्री सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री बने रहे। इसी मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम) कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से पूछा था कि बिना विधायक या एमएलसी बने कोई व्यक्ति इतने लंबे समय तक मंत्री कैसे रह सकता है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है लेकिन उससे पहले ही सरकार ने उन्हें विधान परिषद पहुंचाकर कानूनी विवाद को लगभग समाप्त कर दिया। राज्यपाल ने दी मंजूरी, गजट में नाम प्रकाशित गैजेट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि भाजपा नेता देवेश कुमार के 31 जुलाई 2026 को इस्तीफे से विधान परिषद की एक सीट खाली हुई थी। इसी सीट पर राज्य सरकार की सिफारिश के बाद राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को मनोनीत किया। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने 5 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर उनके नाम का प्रकाशन कर दिया। कौन हैं दीपक प्रकाश श्री दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। उन्हें पहली बार नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाया गया था। बाद में मई 2026 में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया। खास बात यह रही कि इस पूरे समय वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। अब मंत्री पद पर नहीं रहेगा कानूनी सवाल एमएलसी बनने के बाद श्री दीपक प्रकाश अब संवैधानिक रूप से विधानमंडल के सदस्य हो गए हैं। ऐसे में उनके मंत्री बने रहने को लेकर उठ रहे कानूनी सवाल काफी हद तक खत्म हो गए हैं।