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न्यूयॉर्क। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) से सख्त संदेश देते हुए साफ किया कि तेहरान के सामने समझौते का रास्ता खुला है लेकिन उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। श्री ट्रंप ने मंगलवार को महासभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 51 वर्षों से ईरानी शासन पश्चिम एशिया और उसके बाहर हिंसा, अराजकता और तबाही फैलाता रहा है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से लेकर गाजा, रूस-यूक्रेन युद्ध, वेनेजुएला के साथ तेल समझौते, ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य अड्डों और संयुक्त राष्ट्र के बजट तक कई मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पद संभालने के पहले दिन से ही उनका संकल्प स्पष्ट रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन ने अपने परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने संबंधी अमेरिकी प्रस्ताव ठुकराकर बड़ी गलती की। श्री ट्रंप ने ईरान को आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक बताते हुए कहा कि वह अब मध्य पूर्व का ‘दादा’ नहीं रहा। उनका आरोप था कि ईरान पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जखीरे के पीछे तेजी से परमाणु बम बनाने की दिशा में बढ़ रहा था, लेकिन अमेरिका ने उसकी कोशिश नाकाम कर दी। उन्होंने दावा किया कि अगर ईरान अपने मकसद में सफल हो जाता तो परमाणु हथियारों के बल पर दुनिया में तबाही और मौत फैलाने का खतरा पैदा हो सकता था। ‘अब बहुत बड़ा फैसला लेने का समय’ ईरान के भविष्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब एक बड़ा निर्णय लेने का वक्त आ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जाए, जिससे उसे फिर से खड़े होने और एक महान देश बनने का अवसर मिले, या इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई की जाए कि वह भविष्य में दोबारा तबाही न मचा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने और उसके बाद किसी समझौते तक पहुंचने—दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है। श्री ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद ईरान के साथ नया समझौता हो सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनावों का उनकी ईरान नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उनका लक्ष्य यही रहेगा कि ईरान कभी परमाणु शक्ति न बन सके। होर्मुज से गुजरने वाले व्यापार पर टैरिफ लगाने पर विचार अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी सुरक्षा और कूटनीति से जोड़ते हुए कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और व्यापार पर सख्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। अपनी टैरिफ नीति का बचाव करते हुए उन्होंने दावा किया कि टैरिफ के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए उनकी सरकार दुनिया भर में आठ बड़े युद्धों और सैन्य संघर्षों को रोकने में सफल रही है। गाजा पर दावा—युद्ध खत्म, सभी बंधक वापस आए गाजा का जिक्र करते हुए श्री ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सरकार के प्रयासों से वहां चल रहा युद्ध समाप्त हो गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी जीवित और मृत बंधकों को सफलतापूर्वक वापस लाया जा चुका है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध पर कहा कि उनका प्रशासन दोनों देशों के नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संघर्ष अनुमान से कहीं अधिक तेजी से सुलझाया जा सकता है। वेनेजुएला से 65 अरब बैरल तेल की ‘ऐतिहासिक डील’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुए एक बड़े तेल समझौते का भी जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के बीच 65 अरब बैरल तेल को लेकर इतिहास का सबसे बड़ा समझौता हुआ है। इस समझौते से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ हुए एक अन्य समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में दो बड़े सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति मिली है। संयुक्त राष्ट्र बजट में 15% कटौती, 4000 से ज्यादा पद खत्म श्री ट्रंप के भाषण में अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी निशाने पर रहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की आलोचना करते हुए सदस्य देशों से इस संस्था को छोड़ने की अपील की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि 2026 के यूएन बजट में 15 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस कदम के परिणामस्वरूप नौकरशाही के 4,000 से अधिक पद समाप्त हुए हैं। क्यूबा को बताया ‘विफल राष्ट्र’, प्रतिनिधिमंडल ने किया बहिष्कार क्यूबा को लेकर भी अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर सख्त रहे। उन्होंने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को ‘विफल राष्ट्र’ करार देते हुए दावा किया कि वहां जल्द ही स्वतंत्रता आएगी। उनकी इस टिप्पणी के विरोध में क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने सभा का बहिष्कार किया। आखिर में दुनिया को दिया एकजुटता का संदेश ईरान पर कड़ी चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आलोचना के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन का अंत वैश्विक एकजुटता के संदेश के साथ किया। उन्होंने दुनिया भर के देशों से वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने और दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। (स्रोत: यूएन टीवी)