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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई होगी। झारखंड में 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा , फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द किए जाने के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर 20 अगस्त को सुनवाई होगी। सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे सफल अभ्यर्थी हेमंत सोरेन सरकार ने हाल ही में 2014 से आयोजित 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ गया, जिन्होंने परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी। अब सफल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को एकतरफा बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। 'जांच से नहीं, पूरी परीक्षा रद्द करने से है आपत्ति' याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए, लेकिन बिना व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय किए पूरी परीक्षा रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार के इस फैसले से हजारों युवाओं का भविष्य और उनकी नौकरी खतरे में पड़ गई है। 22 परीक्षाएं रद्द, 23 अन्य की जांच के आदेश सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और एक आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का भी फैसला किया है। इस निर्णय का असर उन उम्मीदवारों पर भी पड़ा है, जो विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त होकर सेवाएं दे रहे हैं। जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों का भी बढ़ा विरोध रद्द की गई परीक्षाओं में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा भी शामिल है। इस परीक्षा के जरिए नियुक्त हुए करीब 2,000 अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री की घोषणा के अगले ही दिन अभ्यर्थियों ने राज्य सचिवालय से बिरसा चौक तक मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बढ़ा टकराव एक ओर सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनियमितताओं की जांच की बात कर रही है तो दूसरी ओर सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच का वे स्वागत करते हैं, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द कर उनकी नौकरी समाप्त करना उचित नहीं है। यही वजह है कि मामला अब सड़क से अदालत तक पहुंच चुका है। अब हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें झारखंड हाई कोर्ट में दायर तीनों याचिकाओं पर गुरुवार (20 अगस्त) को सुनवाई होगी। इस सुनवाई पर न केवल हजारों सफल अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया और सरकार के फैसले की वैधता को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय हो सकती है।



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