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यह बिहार सरकार की योजना है, जिसका मकसद किसानों को रासायन (केमिकल) के बिना खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि मिट्टी स्वस्थ रहे और शुद्ध (विषमुक्त) अनाज पैदा हो। 👉 यह योजना क्या है? इसमें किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) करने के लिए मदद दी जाती है रासायनिक खाद की जगह हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट (केचुआ खाद) का उपयोग बढ़ाया जाता है सरकार इसके लिए अनुदान (सब्सिडी) और सलाह देती है 👉 योजना का उद्देश्य मिट्टी की ताकत (उर्वरता) बढ़ाना रासायनिक खाद और दवाओं पर खर्च कम करना शुद्ध और सुरक्षित अनाज पैदा करना किसानों की आय बढ़ाना 👉 किसको फायदा मिलता है? बिहार के सभी जिलों के किसान जो जैविक खेती करना चाहते हैं छोटे, सीमांत और बड़े सभी किसान 👉 क्या-क्या मदद मिलती है? ढैंचा (हरी खाद) के बीज पर 90% तक सब्सिडी वर्मी कम्पोस्ट बनाने की जानकारी और सहायता जैविक खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन कुछ मामलों में अन्य जैविक इनपुट पर भी सहायता 👉 ढैंचा (हरी खाद) क्या है? यह एक खास पौधा है जिसे खेत में उगाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है इससे: मिट्टी उपजाऊ बनती है नमी बनी रहती है रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है 👉 योजना कैसे काम करती है? 1. किसान आवेदन करता है 2. उसे ढैंचा बीज या अन्य जैविक सामग्री पर सब्सिडी मिलती है 3. खेती में जैविक तरीके अपनाए जाते हैं 4. समय-समय पर कृषि विभाग मार्गदर्शन देता है 👉 जरूरी डॉक्यूमेंट योजना का लाभ लेने के लिए ये कागज जरूरी हैं: आधार कार्ड बैंक पासबुक जमीन के कागज मोबाइल नंबर किसान पंजीकरण (DBT) 👉 आवेदन कैसे करें? ✔️ ऑनलाइन DBT Agriculture पोर्टल पर जाएँ रजिस्ट्रेशन नंबर से लॉगिन करें योजना चुनकर आवेदन करें ✔️ CSC (वसुधा केंद्र) से नजदीकी CSC पर जाकर आवेदन करा सकते हैं 👉 आवेदन कहाँ जमा करें? कृषि समन्वयक (पंचायत स्तर) प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) किसान सलाहकार CSC केंद्र 👉 योजना के फायदे खेती की लागत कम होती है मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहती है फसल शुद्ध और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती है जैविक उत्पाद की बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है 👉 विशेष जानकारी यह योजना पूरे बिहार के 38 जिलों में लागू है “जैविक कॉरिडोर योजना” भी इसके साथ जुड़ी है (गंगा किनारे के जिलों में) सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती हो



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