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मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में बर्बरता की तमाम हदों को पार करते हुए दबंगों ने मिट्टी बचाने वाले एक किसान को मिट्टी में मिला दिया। पंचपकडी थाना क्षेत्र के सिसवा मंगल गांव में शुक्रवार को घटित हुई इस घटना ने तालिबानी क्रूरता की ऐसी बेरहम यादों को जीवंत किया है, जिसने कुशासन और सुशासन के फर्क को मिटा दिया है। किसान का कसूर इतना भर था कि अपने खेत से मिट्टी काटकर अवैध रूप से बेच रहे लोगों को ऐसा करने से रोक दिया था। उसके बाद डेढ़ दर्जन लोगों ने मिलकर एक 55 वर्षीय किसान रामबिहारी पाण्डेय को खेत में ही घेर लिया। उसके हाथ पीछे कर गमच्छा से बांध दिया और बेरहमी से पिटाई की। हमलावर बेखौफ थे। उन्हें न पुलिस का डर था और न कानून का भय। दिनदहाड़े किसान को बंधक बनाकर पीटा और सरेआम खेत से घसीटकर तालिबानी अंदाज में गांव के मुखिया के घर तक ले गए। चिंताजनक स्थिति में परिजन उन्हें ढाका के रेफरल अस्पताल ले गए। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर चिकित्सा के लिए चिकित्सकों ने घायल किसान को सदर अस्पताल मोतिहारी के लिए रेफर कर दिया। परन्तु सदर अस्पताल पहुँचने से पहले ही सांसें साथ छोड़ गयीं। इस सम्बंध में किसान के पुत्र धीरज कुमार पाण्डेय ने पुलिस को दिए लिखित बयान में अपने पिता की निर्मम हत्या में संतोष कुमार साह, रघु साह, पार्वती देवी, अनहोती साह, बिगु साह, महेन्द्र साह, पंकज कुमार साह, गजेन्द्र साह, मनोज कुमार साह, ललन साह तथा 5-7 अन्य लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है। किसान पुत्र के अनुसार खेत में बंधक बनाने और बेरहमी से पिटाई किये जाने के से लेकर उसके पिता को गांव में घसीटकर ले जाने तक किसी प्रकार की सहायता नहीं प्राप्त हो सकी। न गांव से मदद मिली और न कानून की अभिरक्षा में तैनात एजेंसियों से। एक अन्नदाता की मौत कई सवालों को जन्म दे गई है। कुशासन और सुशासन के फर्क तलाशे जाने लगे हैं। कानून और मानवीय संवेदनाओं के प्रभाव ढूंढे जाने लगे हैं।



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