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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व कृषि मंत्री और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यालय में फंदे से लटके मिले जबकि घटनास्थल से बरामद एक कथित हस्तलिखित नोट में राजनीतिक दबाव का जिक्र किया गया है और पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला शव करीबी सहयोगी ने रविवार सुबह रामपुरहाट के हाटतलापाड़ा में श्री बनर्जी के पुश्तैनी घर से सटे टीएमसी कार्यालय में उनका शव छत से लटका देखा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और कार्यालय को जांच के लिए सील कर दिया। वहां सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है। करीब 70 वर्षीय श्री बनर्जी रामपुरहाट से पांच बार विधायक रहे थे। वह पश्चिम बंगाल सरकार में कृषि और शिक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालने के साथ वर्ष 2021 से 2026 तक विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे। कथित नोट में लिखा—कभी भ्रष्टाचार नहीं किया पुलिस को घटनास्थल से एक हस्तलिखित चिट्ठी मिली है, जिसे जांच और लिखावट की पुष्टि के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस ने अभी आधिकारिक रूप से यह प्रमाणित नहीं किया है कि चिट्ठी श्री बनर्जी ने ही लिखी थी या उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, कथित नोट में श्री बनर्जी ने छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और किसी काम के बदले किसी से पैसे नहीं लिए। उसमें कथित तौर पर भारी राजनीतिक दबाव का उल्लेख करते हुए परिवार की नई पीढ़ी को राजनीति से दूर रहने और अपनी नौकरी पर ध्यान देने की सलाह भी दी गई है। बताया गया है कि चिट्ठी में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण का भी उल्लेख है। श्री बनर्जी ने कथित रूप से दावा किया कि अध्यक्ष रहने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से उन्हें प्रशासनिक फैसलों में शामिल नहीं किया जा रहा था। चिट्ठी की प्रामाणिकता और उसमें लिखी बातों की सच्चाई फिलहाल जांच का विषय है। ‘रात तक सामान्य थे’, भाई ने उठाए सवाल श्री बनर्जी के छोटे भाई प्रशांत बनर्जी के बयान ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। उन्होंने कहा कि शनिवार आधी रात तक दोनों साथ थे और उस समय आशीष बनर्जी के व्यवहार में किसी तरह का तनाव या असामान्यता दिखाई नहीं दी थी। परिवार ने सवाल उठाया कि कुछ घंटों के भीतर ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद यह घटना सामने आई। परिजनों ने मौत की परिस्थितियों की उचित और विस्तृत जांच की मांग की है। आत्महत्या या कोई और वजह? सियासत गरमाई पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कथित नोट के आधार पर तुरंत किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि टीएमसी में सभी लोगों को भ्रष्ट कहना उचित नहीं है और कुछ नेताओं ने सम्मान के साथ राजनीति की है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने भी मामले की गहराई से जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि वास्तव में क्या हुआ और क्या मौत के पीछे कोई अन्य रहस्य है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक ध्रुव साहा ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट से श्री बनर्जी को 24 हजार से अधिक मतों से हराया था। चुनावी हार के बाद कम हुई थी सक्रियता श्री आशीष बनर्जी वर्ष 2001 से 2026 तक लगातार रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। तृणमूल कांग्रेस ने 2026 के चुनाव में भी उन्हें उम्मीदवार बनाया था लेकिन उन्हें भाजपा प्रत्याशी ध्रुव साहा से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उनकी सक्रियता कम होने की खबरें सामने आई थीं। वह टीएमसी की बीरभूम जिला राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और पार्टी की जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके थे। वर्ष 2022 में रामपुरहाट के बोगतुई में हुई हिंसा के बाद भी वह राजनीतिक चर्चा में रहे थे। पार्टी कार्यालय के बाहर उमड़ी भीड़ मौत की खबर फैलते ही पार्टी कार्यालय के बाहर समर्थकों और स्थानीय लोगों की बड़ी भीड़ जमा हो गई। टीएमसी के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल और पार्टी के अन्य नेताओं ने उन्हें सरल, शालीन और अच्छा इंसान बताते हुए शोक जताया। पुलिस अब कथित नोट, फॉरेंसिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना से पहले की गतिविधियों को जोड़कर मौत का सही क्रम समझने की कोशिश कर रही है। फिलहाल अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच पूरी होने से पहले इसे आत्महत्या या किसी अन्य कारण से हुई मौत कहना जल्दबाजी होगी।



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