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मुंबई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शेयर बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला लगातार चौथे महीने भी जारी रखते हुए जून के पहले सप्ताह में पूंजी बाजार से 37804 करोड़ रुपये निकाल लिए। केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सप्ताह के पांच कारोबारी दिनों में शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर बिकवाली की। इस दौरान उन्होंने 42927 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, डेट यानी बॉन्ड बाजार में उनकी रुचि बनी रही और उन्होंने वहां 5326 करोड़ रुपये का निवेश किया। म्यूचुअल फंड और हाइब्रिड फंड से भी निकाला पैसा विदेशी निवेशकों ने सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि म्यूचुअल फंड और हाइब्रिड निवेश साधनों से भी पैसा निकाला। आंकड़ों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में उनका निवेश 180 करोड़ रुपये घटा जबकि हाइब्रिड फंड से करीब 24 करोड़ रुपये की निकासी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता और दुनिया के कई बाजारों में निवेश के बेहतर अवसर मिलने के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में सतर्क रुख अपना रहे हैं। मार्च से लगातार जारी है भारी बिकवाली विदेशी निवेशकों की बिकवाली पिछले कई महीनों से जारी है। मार्च में उन्होंने रिकॉर्ड 1.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। इसके बाद अप्रैल में 70786 करोड़ रुपये और मई में 29919 करोड़ रुपये बाजार से निकाले गए। जून के पहले सप्ताह के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों का रुख अभी भी बदला नहीं है। इस साल अब तक 2.56 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले साल 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से कुल दो लाख 56 हजार 724 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा असर शेयर बाजार पर पड़ा है, जहां विदेशी निवेशकों ने दो लाख 67 हजार 859 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। यह आंकड़ा बताता है कि इस साल विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में निवेश बढ़ाने की बजाय मुनाफावसूली और निकासी को प्राथमिकता दी है। घरेलू निवेशक दे रहे बाजार को सहारा हालांकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है। इसकी मुख्य वजह घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई), म्यूचुअल फंड और खुदरा निवेशकों की मजबूत खरीददारी है। घरेलू निवेशक लगातार बाजार में पैसा लगा रहे हैं, जिससे विदेशी बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो रहा है। आगे क्या रहेगा नजरिया बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नीति, वैश्विक आर्थिक हालात और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर बाजार की नजर रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं तो विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा सकते हैं। फिलहाल उनके रुख को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।