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मुंबई। अभिनेत्री विधात्री बंदी ने अपने अभिनय करियर के सबसे यादगार पलों में से एक का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और ‘फ्रेंड्स’ स्टार जेनिफर एनिस्टन के सामने परफॉर्म करने का मौका मिला था। विधात्री ने कहा कि उस एक अनुभव ने न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ाया, बल्कि उन्हें यह यकीन भी दिलाया कि वह अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। 45 छात्रों में चुनी गईं इकलौती भारतीय विधात्री ने बताया कि लॉस एंजिल्स स्थित यूसीएलए में आयोजित एक मास्टरक्लास के दौरान उनके प्रोफेसर एंड्रिया बैंडवॉल्ड और निक्की डेलोच ने 45 छात्रों में से उन्हें जेनिफर एनिस्टन के सामने एक सीन परफॉर्म करने के लिए चुना। खास बात यह थी कि वह अपनी बैच की सबसे कम उम्र की और इकलौती भारतीय छात्रा थीं। 'सामने जेनिफर एनिस्टन को देखकर मैं घबरा गई थी' विधात्री ने उस पल को याद करते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले मंच पर जाकर परफॉर्म करना था, जिससे दबाव और बढ़ गया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने ऊपर देखा, सामने जेनिफर एनिस्टन बैठी थीं, जिन्हें वह बचपन से 'रेचल ग्रीन' के किरदार में देखती आई थीं। उन्होंने कहा, "कुछ सेकंड के लिए मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि यह सच है। लेकिन मैंने गहरी सांस ली, खुद को संभाला और जैसे ही पहली लाइन बोली, सारी घबराहट खत्म हो गई। उसके बाद मैं पूरी तरह अपने किरदार में डूब गई।" परफॉर्मेंस के बाद मिला खास सरप्राइज विधात्री ने बताया कि उनके अभिनय के बाद जेनिफर एनिस्टन ने उन्हें परफॉर्मेंस पर जरूरी सुझाव दिए, उनके काम की सराहना की और उन्हें गले भी लगाया। उनके मुताबिक, यह पल उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था। 'चार महीने पहले खुद पर था शक' विधात्री ने कहा कि इस अनुभव से कुछ महीने पहले तक वह खुद से लगातार सवाल कर रही थीं कि क्या अभिनय उनके लिए सही करियर है, क्या वह इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाएंगी और क्या उनमें वह क्षमता है जिसकी इस पेशे में जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि महज चार महीने बाद लॉस एंजिल्स में जेनिफर एनिस्टन के सामने परफॉर्म करने के लिए चुना जाना उनके सभी सवालों का जवाब बन गया। 'उस दिन खुद पर भरोसा करना सीख लिया' विधात्री के मुताबिक, उस अनुभव ने उन्हें सबसे बड़ी सीख आत्मविश्वास की दी। उन्होंने कहा कि कोई भी पुरस्कार या सम्मान उस पल की बराबरी नहीं कर सकता, क्योंकि उसी दिन उन्हें पहली बार लगा कि वह इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि शायद वही पल था जब उन्होंने खुद से यह पूछना बंद कर दिया कि "क्या मैं यह कर सकती हूं?" और पूरे विश्वास के साथ खुद से कहा, "हां, मैं यह कर सकती हूं।" फैंस को प्रेरित कर रही है विधात्री की कहानी विधात्री बंदी की यह कहानी सिर्फ एक यादगार मुलाकात नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो अपने सपनों को लेकर असमंजस में रहते हैं। उनका मानना है कि मेहनत, धैर्य और सही मौके के साथ आत्मविश्वास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।