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पटना। बिहार मंत्रिपरिषद ने बुधवार को आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका चयन मार्गदर्शिका-2026 को मंजूरी दे दी, जिससे राज्य में लंबे समय से खाली पड़े 22,891 सेविका और सहायिका पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। पुरानी 2022 की मार्गदर्शिका की जगह लागू होंगे नए नियम समाज कल्याण विभाग के एकीकृत बाल विकास सेवा निदेशालय के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका और सहायिका की नियुक्ति अब नई मार्गदर्शिका के अनुसार होगी। अभी तक चयन प्रक्रिया के लिए आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका चयन मार्गदर्शिका-2022 प्रभावी थी। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद नई चयन मार्गदर्शिका-2026 लागू होने से भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और खाली पदों को तेजी से भरने का रास्ता खुलेगा। 6,141 सेविका और 16,750 सहायिका की होगी भर्ती विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार में आंगनबाड़ी सेविका के 6,141 पद और सहायिका के 16,750 पद खाली हैं। इस तरह कुल 22,891 रिक्त पदों पर चयन किया जा सकेगा। इतनी बड़ी संख्या में पद भरने से एक ओर आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर हजारों महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वंचित महिलाओं के लिए खुलेगा रोजगार का नया रास्ता नई मार्गदर्शिका का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पोषक क्षेत्र के बहुल्य वर्ग की महिलाओं को सेविका और सहायिका के रूप में चयन का अवसर देना है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में समुदाय की भूमिका भी मजबूत होगी। नई व्यवस्था से चयन प्रक्रिया का दायरा बढ़ने और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर आसान होने की उम्मीद है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचती हैं जरूरी सेवाएं समेकित बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को कई महत्वपूर्ण सेवाएं दी जाती हैं। इनमें पूरक पोषाहार, स्कूल-पूर्व शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, रेफरल सेवाएं, टीकाकरण और पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा शामिल हैं। सेविका और सहायिका के हजारों पद खाली रहने से इन सेवाओं के संचालन पर असर पड़ता है।