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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने मंगलवार को नीट-2026 प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में छात्रों एवं प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दीं, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लेने की घोषणा की। अनुच्छेद 142 के तहत मिला विशेष राहत आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना भी शामिल थे, ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की जाती हैं। अन्य राज्यों में भी कार्रवाई पर रोक सुप्रीम कोर्ट ने केवल पांच राज्यों तक ही राहत सीमित नहीं रखी, बल्कि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज ऐसे ही मामलों में भी आगे कोई कार्रवाई या जांच नहीं करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में अब कोई नई एफआईआर भी दर्ज नहीं की जाएगी। 'युवाओं का भविष्य सबसे अहम' पीठ ने कहा कि यह फैसला उन हजारों युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन में भाग लिया था। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य में कानूनी मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा। केंद्र सरकार ने दिए कई अहम आश्वासन सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार सीजेपी नेतृत्व को दिए गए सभी आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इनमें प्रमुख रूप से छात्रों पर दर्ज आपराधिक मामलों का समाधान और शैक्षणिक कारणों, विशेषकर नीट-2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा जैसे मुद्दे शामिल हैं। तीन महीने में बनेगी राष्ट्रीय मुआवजा नीति सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्यों से परामर्श कर तीन महीने के भीतर पूरे देश में लागू होने वाली मुआवजा नीति तैयार करे। यह नीति शैक्षणिक कारणों से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए एक समान व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। दिल्ली के 2873 लोगों पर अलग कार्रवाई केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि दिल्ली में 2873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के रिकॉर्ड में गंभीर आपराधिक इतिहास दर्ज है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को केवल शारीरिक चोट और सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों में इनके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। सीजेपी ने वापस लिया 05 सितंबर का मार्च सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार के आश्वासनों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत को बताया कि संगठन अब 05 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस ले रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन को उम्मीद है कि अदालत के निर्देशों और सरकार के वादों का समयबद्ध पालन किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश बोले- संवाद से हर समाधान संभव मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सकारात्मक सोच और अच्छी नीयत से आगे बढ़ें तो हर विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जिस पर खुले मन से बातचीत कर समाधान न खोजा जा सके।