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नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका-इजरायल की सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर ब्रिक्स देशों से व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरे एकीकरण की अपील करते हुए आज कहा कि व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और वित्तीय व्यवस्था पर राजनीतिक या सैन्य दबाव का असर किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को भी प्रभावित करता है। श्री पेजेशकियन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान पिछले कई वर्षों से व्यापक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। हाल के महीनों में यह दबाव कहीं अधिक खतरनाक दौर में पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइली शासन पर सैन्य आक्रमण का आरोप ईरानी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइली शासन की सैन्य कार्रवाई के कारण हालात अधिक गंभीर हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस आक्रमण से मानवीय और भौतिक नुकसान हुआ है। साथ ही, इसने एक बार फिर उस महत्वपूर्ण सच्चाई को सामने रखा है कि आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग करके नहीं देखा जा सकता। ‘आर्थिक दबाव की आंच सीमाओं तक नहीं रुकती’ श्री पेजेशकियन ने अपने संबोधन में व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और वित्तीय प्रणाली को आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख आधारों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब किसी देश की इन व्यवस्थाओं पर राजनीतिक या सैन्य दबाव डाला जाता है, तो उसका प्रभाव केवल उसी देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। ऐसा दबाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है और उसका असर वैश्विक स्थिरता तक पहुंच सकता है। ब्रिक्स के मंच से अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को जोड़ने का संदेश ईरानी राष्ट्रपति के वक्तव्य का केंद्रीय संदेश साफ था—अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को अलग-अलग खानों में रखकर नहीं देखा जा सकता। किसी देश के व्यापारिक, ऊर्जा, ढांचागत या वित्तीय तंत्र पर संकट आने की स्थिति में उसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं।ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से पेजेशकियन ने प्रतिबंधों और सैन्य दबाव को केवल ईरान की चुनौती मानने के बजाय क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता से जुड़ा विषय बताया।



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