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मुंबई। सस्ते लोन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिलेगी। आरबीआई ने रेपो रेट को पहले की तरह बरकरार रखा है, जिससे होम, कार और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल कमी की संभावना खत्म हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई बढ़ने के बावजूद रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा और कहा है कि फिलहाल महंगाई मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण बढ़ी है, इसलिए ब्याज दरों में बदलाव की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। सभी सदस्यों ने दरें स्थिर रखने के पक्ष में दिया वोट आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया। इसके साथ ही मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ रखा गया है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के कारण— स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर 5 प्रतिशत रहेगी मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर 5.50 प्रतिशत पर कायम रहेगी बैंक दर भी 5.50 प्रतिशत बनी रहेगी महंगाई बढ़ी, लेकिन असली दबाव खाने और ईंधन से आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को एमपीसी बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि जून 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। इससे पहले यह लगातार 16 महीनों तक लक्ष्य से नीचे बनी हुई थी। हालांकि जून की महंगाई आरबीआई के पहले अनुमान से 0.30 प्रतिशत अंक कम रही। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य और ईंधन की कीमतों में तेजी रही। मई और जून के दौरान कई खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के बाद खुदरा ईंधन कीमतों में भी संशोधन हुआ। कोर इन्फ्लेशन ने दी बड़ी राहत महंगाई बढ़ने के बावजूद खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर इन्फ्लेशन मई-जून के दौरान 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रहा।कीमती धातुओं को भी हटा दिया जाए तो कोर महंगाई केवल 2.3 से 2.5 प्रतिशत के बीच रही। आरबीआई ने इसे इस बात का संकेत माना कि अर्थव्यवस्था में मांग से पैदा होने वाला व्यापक मूल्य दबाव फिलहाल सीमित है। रेपो रेट क्यों नहीं घटाई गई श्री मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में महंगाई और बढ़ सकती है तथा चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। लेकिन, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन जैसे आपूर्ति पक्ष के कारणों से होने की संभावना है। कोर महंगाई अभी नियंत्रित है और तीसरी तिमाही के बाद घटने की उम्मीद है। इसी वजह से समिति ने कोई तत्काल मौद्रिक कदम उठाने के बजाय महंगाई की दिशा और उसकी संरचना पर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार करना बेहतर समझा। जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान पहले के मुकाबले 0.10 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। तिमाही आधार पर वृद्धि का अनुमान इस प्रकार है— पहली तिमाही: 7.0 प्रतिशत दूसरी तिमाही: 6.4 प्रतिशत तीसरी तिमाही: 6.5 प्रतिशत चौथी तिमाही: 6.8 प्रतिशत वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। घरेलू मांग मजबूत, निवेश भी बना हुआ है टिकाऊ आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उपलब्ध संकेतकों से घरेलू मांग स्थिर दिख रही है। निजी खपत मजबूत बनी हुई है, जबकि निर्माण, पूंजीगत वस्तुओं और बैंक ऋण से जुड़े आंकड़े निवेश गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं। सेवा निर्यात की अच्छी वृद्धि और वस्तु निर्यात में सुधार से बाहरी मांग को भी सहारा मिला है। महंगाई का अनुमान घटाकर 5 प्रतिशत आरबीआई ने 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 0.10 प्रतिशत अंक घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। तिमाही अनुमान के मुताबिक- दूसरी तिमाही: 4.7 प्रतिशत तीसरी तिमाही: 5.9 प्रतिशत चौथी तिमाही: 5.5 प्रतिशत वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पूरे वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई 4.3 प्रतिशत रह सकती है। एल नीनो और कमजोर मानसून बने सबसे बड़े जोखिम आरबीआई ने चेताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का कमजोर और असमान रहना कृषि क्षेत्र तथा ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। एल नीनो के कारण बारिश के समय और भौगोलिक वितरण पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और सक्रिय आपूर्ति प्रबंधन इन जोखिमों को कुछ हद तक कम कर सकता है। वैश्विक परिदृश्य अभी भी धुंधला आरबीआई के अनुसार, ऊर्जा कीमतें और आपूर्ति शृंखला से जुड़े दबाव अब भी ऊंचे और अनिश्चित हैं। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार नीति और मानसून की स्थिति घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए इंतजार की रणनीति अपनाई है। कर्जदारों को राहत नहीं, लेकिन नई बढ़ोतरी भी नहीं रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बने रहने का अर्थ है कि फिलहाल बैंक ऋण की ब्याज दरों में आरबीआई की ओर से तत्काल बदलाव का दबाव नहीं होगा। होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वालों को दर कटौती की नई राहत नहीं मिली है, लेकिन ब्याज दर बढ़ने का खतरा भी फिलहाल टल गया है। अब बाजार की नजर महंगाई, मानसून और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के अगले आंकड़ों पर रहेगी।



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