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पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित दवा घोटाला मामले में आज दो सरकारी कर्मियों को तीन-तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी किया । किन्हें मिली सजा, कौन हुए बरी सीबीआई के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद मेडिकल स्टोर डिपो (एमएसडी), मुंबई के स्टोरकीपर बी. रमन्ना और जहानाबाद जिला अस्पताल के लिपिक कृष्ण कुमार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत दोषी ठहराया। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने दोनों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, इसी मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। क्या था पूरा मामला सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सत्यजीत सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2005 में दर्ज किया गया था। जांच के बाद सीबीआई ने कुल छह लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद बाकी आरोपियों के खिलाफ विचारण जारी रहा। अभियोजन के मुताबिक, दोषियों ने आपसी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर लगभग 7 लाख रुपये की दवाओं का गबन किया था। अदालत में कैसे साबित हुआ मामला इस मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 24 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इन्हीं गवाहियों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि बी. रमन्ना और कृष्ण कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं। जुर्माना नहीं भरा तो बढ़ेगी सजा अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भरना दोनों दोषियों के लिए अनिवार्य होगा। यदि वे यह राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें एक-एक माह के साधारण कारावास की सजा अलग से भुगतनी पड़ेगी।