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न्यूयॉर्क। युद्ध और मानवीय संकट से लेकर जलवायु परिवर्तन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तेज रफ्तार तक दुनिया के सामने बढ़ती चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने मंगलवार को चेताया कि भू-राजनीतिक दरारें अब ‘बड़ी खाइयों’ में बदल रही हैं और कोई भी महाशक्ति अपनी सैन्य, आर्थिक या तकनीकी ताकत के बूते अकेले वैश्विक शांति और सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। युद्धों ने छोड़ी तबाही, बढ़ी क्रूरता संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा को संबोधित करते हुए श्री गुटेरस ने पिछले एक दशक में दुनिया के सामने आए संकटों का जिक्र किया। इसमें युद्ध, मानवीय संकट, बढ़ती असमानता, जलवायु परिवर्तन और एआई का तेजी से उभार प्रमुख रहे। उन्होंने कहा, “युद्धों के विनाशकारी परिणाम हुए और वे भयानक क्रूरता के साथ लंबे समय तक चलते रहे।” उन्होंने नागरिकों पर हमलों, मानवाधिकारों के उल्लंघन, भूख को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने, मानवीय सहायता कर्मियों की हत्या और अंतरराष्ट्रीय कानून के कमजोर पड़ने पर भी चिंता जताई। ‘भरोसा घटा, जलवायु संकट बना रोज की हकीकत’ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि दुनिया में भू-राजनीतिक विभाजन गहरे हुए हैं और देशों के बीच भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट अब भविष्य की कोई दूर की चेतावनी नहीं रहा बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है। इसी दौरान एआई इतनी तेजी से आगे बढ़ा है कि इसकी रफ्तार ने इसे बनाने वालों में से कुछ को भी हैरान कर दिया है। गाजा पर बोले- अब लड़ाई रुकनी चाहिए इजरायल का सीधे नाम लिए बिना श्री गुटेरस ने कहा कि अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद हुई प्रतिक्रिया के कारण गाजा में अभूतपूर्व स्तर पर हत्याएं और तबाही हुई है। उन्होंने दो टूक कहा, “लड़ाई रुकनी चाहिए और मानवीय मदद पहुंचनी चाहिए।” उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने और वहां संयुक्त राष्ट्र की भूमिका से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी फैसलों का भी उल्लेख किया। ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन खत्म नहीं होने दे सकते’ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वेस्ट बैंक में हिंसा, लोगों को बेघर किए जाने और बस्तियों के विस्तार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे शांति की संभावनाओं को नुकसान पहुंच रहा है और जातीय संहार का खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम अपनी आंखों के सामने ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ को खत्म नहीं होने दे सकते।” ‘सिर्फ सैन्य ताकत से नहीं आ सकती शांति’ अपने संबोधन में श्री गुटेरस ने महाशक्तियों की सैन्य, आर्थिक और तकनीकी ताकत की सीमाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ सैन्य ताकत से शांति नहीं आ सकती। सिर्फ आर्थिक ताकत से स्थिरता नहीं आ सकती। और सिर्फ तकनीकी ताकत सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।” उन्होंने कि दुनिया की मौजूदा चुनौतियां इतनी बड़ी हैं कि कोई एक महाशक्ति अकेले उनका समाधान नहीं कर सकती। दुनिया को विरोधी गुटों में बांटने से बचने की अपील संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने देशों से अपील की कि वे दुनिया को अलग-अलग आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा प्रणालियों वाले विरोधी गुटों में नए सिरे से बंटने से रोकें। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर केंद्रित एक मजबूत बहुपक्षीय व्यवस्था की वकालत की, जो आधुनिक दुनिया में बदलते शक्ति संतुलन को बेहतर तरीके से दर्शा सके। उन्होंने कहा, “हमारे सामने परीक्षा यह है कि क्या सत्ता का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा या उससे बाहर जाकर। हमें उस परीक्षा में सफल होना होगा।” कंपनियों और व्यक्तियों के हाथों में बढ़ती ताकत पर चिंता श्री गुटेरस ने चेताया कि सत्ता तेजी से सरकारों के हाथों से निकलकर कुछ निजी कंपनियों और व्यक्तियों के हाथों में जा रही है। उन्होंने कहा कि इनकी ताकत और प्रभाव अब राजनीति और अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर सूचना, तकनीक और नागरिक जीवन तक फैल रहा है। ‘इंसान मशीनों को सौंप रहे सत्ता’ एआई को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी और भी गंभीर रही। उन्होंने कहा, “इंसान तेजी से मशीनों को सत्ता सौंप रहे हैं।” उन्होंने एआई आधारित स्वायत्त प्रणालियों और घातक स्वायत्त हथियारों से पैदा होने वाले खतरों की ओर ध्यान दिलाते हुए तत्काल अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया और कहा कि जिन सरकारों के पास सबसे ज्यादा AI क्षमताएं हैं, उन पर इससे पैदा होने वाले जोखिमों को संभालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है। एआई की बड़ी ताकतें करें बातचीत श्री गुटेरस ने एआई के क्षेत्र में बड़ी ताकतों से आपसी बातचीत, पारदर्शिता और सहयोग के रास्ते बनाने की अपील की। इनमें मुख्य रूप से अमेरिका और चीन का उल्लेख किया गया है। उन्होंने शीत युद्ध के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने साझा अस्तित्व से जुड़े खतरों से निपटने के तरीके विकसित किए थे। उन्होंने स्वायत्त हथियारों को लेकर कहा, “हमारे भविष्य में किलर रोबोट्स की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को बिना नियम-कानून वाली AI प्रणालियों के लिए परीक्षण का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। बड़ी तेल कंपनियों पर गुटेरस का हमला जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बड़ी जीवाश्म ईंधन कंपनियों को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के गंभीर नतीजों का सामना कर रही है जबकि यह उद्योग मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने कहा, “दशकों से, बड़ी तेल कंपनियों ने वातावरण को एक खुले नाले की तरह इस्तेमाल किया है और इसके नतीजों से फायदा उठाया है।” जलवायु संकट बढ़ा रहा आम आदमी का खर्च श्री गुटेरस ने बड़ी पश्चिमी तेल कंपनियों के मुनाफे की तुलना विकासशील देशों में जलवायु अनुकूलन के लिए उपलब्ध बेहद कम अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त से की। उन्होंने कहा कि बिगड़ते जलवायु हालात का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है और ऊर्जा, भोजन तथा बीमा की लागत बढ़ रही है। सुरक्षा परिषद में अफ्रीका को स्थायी सीट देने की मांग संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की अपनी मांग दोहराते हुए अफ्रीकी देशों के लिए स्थायी सीट नहीं होने को अन्यायपूर्ण और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाएं आज भी पुराने दौर के शक्ति ढांचे को दर्शाती हैं, जबकि देशों के बीच और उनके भीतर प्रभाव तथा ताकत का बंटवारा लगातार बदल रहा है। आलोचनाओं के बीच यूएन का किया बचाव संयुक्त राष्ट्र की आलोचनाओं के बावजूद श्री गुटेरस ने संगठन को जरूरी बताते हुए कहा कि यह ऐसा मंच है, जहां शक्तिशाली देशों को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है। उन्होंने समानता पर जोर देते हुए कहा, “समानता कोई सपना नहीं है। यह एक फैसला है।” दुनिया के सामने दो रास्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अपने संबोधन में दुनिया के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखा- या तो बढ़ते तनाव, लेन-देन आधारित राजनीति और घटते अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में आगे बढ़ा जाए, या फिर अधिक प्रतिनिधित्व वाली मजबूत बहुपक्षीय व्यवस्था को अपनाया जाए। उनके संदेश का केंद्र यही रहा कि मानवता के सामने युद्ध, जलवायु परिवर्तन, असमानता, AI और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां इतनी व्यापक हैं कि दुनिया की कोई भी ताकत अकेले उनका समाधान नहीं कर सकती और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। (स्रोत: यूएन टीवी)



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