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कटिहार। जम्मू-कश्मीर में तैनात और छुट्टी पर घर आए 56 वर्षीय सैनिक मोहम्मद सगीरुद्दीन का हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन होने के बाद बुधवार को उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जहां अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार में कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड की शिकारपुर पंचायत के छोटा शिकारपुर गांव निवासी 56 वर्षीय मोहम्मद सगीरुद्दीन जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। वह 55 बटालियन के अधीन सब-इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। छुट्टी पर आए थे घर, 31 अगस्त को लौटना था जम्मू सगीरुद्दीन तीन अगस्त को छुट्टी पर अपने गांव आए थे। उनकी छुट्टियां 31 अगस्त को समाप्त होने वाली थीं, जिसके बाद उन्हें जम्मू में दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करनी थी। इससे पहले ही हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। उनकी अचानक मौत से परिवार और रिश्तेदारों के साथ पूरे बारसोई प्रखंड में शोक की लहर दौड़ गई। वह अपने पीछे पत्नी, एक बेटे और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। पुलिस के जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर बुधवार सुबह आबादपुर थानाध्यक्ष मोहम्मद शादाब के नेतृत्व में पुलिस के जवान छोटा शिकारपुर पहुंचे। सैनिक के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया और जनाजे को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अंतिम रस्मों से पहले पार्थिव शरीर से सम्मानपूर्वक तिरंगा हटाकर उनके बेटे मोहम्मद फैजान को सौंपा गया। इस भावुक क्षण में वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब सगीरुद्दीन की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। लोगों ने उनके जनाजे को कंधा दिया और देश के प्रति उनकी सेवा को सलाम किया। तिरंगे में लिपटे सैनिक की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। हर चेहरे पर बिछड़ने का दुख था तो दिल में देशसेवा करने वाले अपने वीर सपूत के प्रति गर्व भी दिखाई दिया। चार साल की सेवा थी बाकी मृतक के बेटे मोहम्मद फैजान ने बताया कि उनके पिता की नौकरी के अभी चार वर्ष बाकी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगा दिया, जिस पर परिवार को गर्व है। फैजान ने कहा कि यदि उन्हें भी भारतीय सेना में शामिल होने का अवसर मिला तो वह खुशी-खुशी देश की सेवा करने के लिए तैयार रहेंगे। बेटे का संकल्प—मौका मिला तो मैं भी करूंगा देशसेवा पिता को अंतिम विदाई देते हुए फैजान के शब्दों में दुख के साथ गर्व भी झलका। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने अपनी जिंदगी देश के नाम कर दी और उनका समर्पण परिवार के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। अंतिम यात्रा में प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि मोहम्मद जिन्ना, मुखिया हाजी हसन अंसारी, अबू ताल्हा, मुशर्रफ हुसैन, सिफतुल्लाह और मोहम्मद सलाउद्दीन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।