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लंदन। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अली बहरेनी ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट से विकासशील देशों पर पड़ने वाले आर्थिक और विकास संबंधी प्रभावों का कोई भी आकलन इसके मूल कारणों की चर्चा के बिना अधूरा रहेगा। अंकटाड की उच्चस्तरीय बैठक में उठाया मुद्दा इरना की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि बहरेनी ने संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) के व्यापार और विकास बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित किया। बैठक का विषय था—‘होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम का विकासशील देशों पर प्रभाव’। श्री बहरेनी ने कहा कि होर्मुज की वर्तमान स्थिति ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की “अवैध सैन्य आक्रामकता” का प्रत्यक्ष परिणाम है। हालांकि, यह ईरान का आरोप है और विज्ञप्ति में अमेरिकी या इजरायली पक्ष की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। ईरान और ओमान समुद्री आवाजाही बहाल करने में जुटे ईरानी प्रतिनिधि ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात दोबारा शुरू कराने के लिए ईरान और ओमान लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देश आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर रहे हैं और ये प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। होर्मुज में समुद्री यातायात की स्थिति को लेकर यह कूटनीतिक पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि संकट का असर केवल क्षेत्रीय गतिविधियों तक सीमित रहने के बजाय विकासशील अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच सकता है। व्यापार से ऊर्जा और खाद्य क्षेत्र तक असर की चेतावनी बहरेनी ने चेतावनी दी कि संकट के प्रभाव व्यापार, ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और अर्थव्यवस्था से जुड़े दूसरे माध्यमों के जरिये फैल सकते हैं। ऐसी स्थिति में उन विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर अधिक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि संकट का विश्लेषण करते समय केवल तात्कालिक आर्थिक नुकसान देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके दीर्घकालिक और संयुक्त प्रभावों को भी आकलन का हिस्सा बनाना जरूरी है। एकतरफा प्रतिबंधों का भी हो आकलन ईरानी राजदूत ने अंकटाड से एकतरफा दबावकारी उपायों के संचयी प्रभाव पर भी उचित ध्यान देने का आग्रह किया। उनके मुताबिक ऐसे उपाय किसी देश के विकास और आर्थिक झटकों का सामना करने की उसकी क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।