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मोतिहारी: पूर्वी चंपारण पुलिस ने कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले एक संगठित अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बिहार सैन्य पुलिस (बीएमपी) के एक बर्खास्त जवान और दो बर्खास्त होमगार्ड समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरफ्तार ठगों के पास से करीब चार लाख रुपये मूल्य के ‘चिल्ड्रेन बैंक’ लिखे नकली नोट, 34 हजार रुपये नकद, एक देसी कट्टा, कारतूस और पुलिस की कई वर्दियां बरामद की हैं। गुप्त सूचना पर बनी विशेष टीम सदर एसडीपीओ जितेश पांडेय ने गुरुवार को बताया कि पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात को गिरोह की गतिविधियों के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को दबोच लिया। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह लंबे समय से लोगों को नोट दोगुना करने का लालच देकर ठगी कर रहा था। नकली नोट दिखाकर जीतते थे भरोसा पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य पहले लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने का भरोसा देते थे। विश्वास जमाने के लिए वे ‘चिल्ड्रेन बैंक’ लिखे नकली नोटों की गड्डियां दिखाते थे। जब कोई व्यक्ति बड़ी रकम लेकर उनके पास पहुंचता तो आरोपी रुपये लेकर फरार हो जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने लोगों को ठगा गया और कुल कितनी रकम हड़पी गई। पुलिस वर्दियों के इस्तेमाल की भी जांच छापेमारी में पुलिस की कई वर्दियां मिलने से मामला और गंभीर हो गया है। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपी पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराते थे या पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे। देसी कट्टा और जिंदा कारतूस की बरामदगी से यह आशंका भी मजबूत हुई है कि गिरोह जरूरत पड़ने पर हथियार का इस्तेमाल कर सकता था। दो आरोपी भोजपुर के, सात पूर्वी चंपारण के श्री पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार नौ आरोपियों में से दो भोजपुर जिले के रहने वाले हैं जबकि सात पूर्वी चंपारण जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बासमन गांव के निवासी बताए गए हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क एक से अधिक जिलों में फैला हो सकता है। इसलिए, आरोपियों के पुराने संपर्कों, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। और गिरफ्तारियों की संभावना पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि गिरोह के पीछे कौन लोग काम कर रहे थे, किन-किन जिलों में ठगी की गई और क्या इसमें कोई सफेदपोश या प्रभावशाली व्यक्ति भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर मामले में जल्द कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।



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