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वाशिंगटन। रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके राजस्व स्रोतों को सीमित करने के मकसद से अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को भारी बहुमत से एक व्यापक प्रतिबंध विधेयक पारित कर दिया, जिसमें रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देने का प्रावधान है और इस सूची में भारत तथा चीन भी शामिल हैं। 86 पक्ष में, सिर्फ 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने इस द्विदलीय विधेयक को 86 के मुकाबले 11 मतों से मंजूरी दी। इतने बड़े अंतर से पारित होना यह दिखाता है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के मुद्दे पर सीनेट में व्यापक समर्थन बना है। इस विधेयक के पीछे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की करीब एक साल लंबी मुहिम का उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन को मजबूत करना और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ाना था। रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर निशाना विधेयक का सबसे अहम हिस्सा उन देशों से जुड़ा है जो रूस से तेल, गैस और दूसरे निर्यात उत्पाद खरीदना जारी रखते हैं। इसके पीछे मकसद रूस की उस कमाई को कम करना बताया गया है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच उसके राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है। यानी यह विधेयक केवल रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों पर भी आर्थिक दबाव डालने की व्यवस्था करता है। भारत और चीन क्यों आए दायरे में यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के शीर्ष पांच खरीददारों पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है। विशेष रूप से भारत और चीन का नाम उन देशों में लिया गया है, जिन पर यह प्रावधान लागू हो सकता है। इसका अर्थ यह है कि विधेयक आगे की पूरी विधायी प्रक्रिया पार कर कानून बनता है और राष्ट्रपति इसके प्रावधानों का इस्तेमाल करते हैं तो रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर भारत जैसे देशों पर अमेरिकी शुल्क का दबाव बढ़ सकता है। 15 प्रतिशत से कम गैस आयात करने वालों को राहत विधेयक में सभी देशों के लिए एक जैसा नियम नहीं रखा गया है। इसमें उन देशों के लिए अपवाद का प्रावधान है जो अपनी कुल प्राकृतिक गैस जरूरत का 15 प्रतिशत से कम रूस से आयात करते हैं और उस आयात को कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं। इस तरह विधेयक का मुख्य फोकस रूस पर अधिक निर्भर बड़े ऊर्जा खरीददारों पर है। यूक्रेन युद्ध के बीच सीनेट का बड़ा कदम यह मतदान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर सीनेट की अब तक की सबसे ठोस कार्रवाइयों में से एक है। अमेरिकी कांग्रेस लंबे समय से यूक्रेन को धन और हथियारों की आपूर्ति जारी रखने की कोशिश करती रही है जबकि ट्रंप ने प्रतिबंध पैकेज के लिए समर्थन का संकेत दिया है। अब दबाव प्रतिनिधि सभा पर है, जहां इस विधेयक को मतदान के लिए लिया जाना बाकी है। व्हाइट हाउस तक पहुंचने से पहले अभी एक और पड़ाव सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी विधेयक तुरंत कानून नहीं बन जाएगा। इसे प्रतिनिधि सभा से भी पारित होना होगा और उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। व्हाइट हाउस में इस प्रतिबंध विधेयक को लेकर एक समझौते की घोषणा 10 जुलाई को हुई थी। ग्राहम की विरासत से जुड़ा बिल इस द्विदलीय पैकेज पर दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का नाम जुड़ा है और उन्होंने यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन मजबूत करने की दिशा में लंबे समय तक इस पहल को आगे बढ़ाया था। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मतदान के दौरान ग्राहम को याद करते हुए कहा कि वह मानना चाहते हैं कि लिंडसे ग्राहम भी यह सब देख रहे होंगे। पुतिन और रूसी संस्थानों पर भी प्रतिबंध विधेयक केवल रूस से व्यापार करने वाले देशों तक सीमित नहीं है। इसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं, रूसी वित्तीय संस्थानों और रूसी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने के प्रावधान शामिल हैं। इस तरह अमेरिका की रणनीति एक साथ दो मोर्चों पर दबाव बनाने की है—एक तरफ रूस के शीर्ष नेतृत्व और संस्थानों पर और दूसरी तरफ उसके बड़े ऊर्जा खरीदार देशों पर। भारत के लिए क्यों अहम है यह विधेयक भारत के संदर्भ में इस विधेयक का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें उसे रूसी तेल या प्राकृतिक गैस के बड़े खरीददारों में सीधे नामित किया गया है। हालांकि फिलहाल यह अमेरिकी सीनेट से पारित विधेयक है और आगे प्रतिनिधि सभा की मंजूरी तथा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी हैं, इसलिए भारत पर किसी शुल्क को अभी लागू मानना सही नहीं होगा। लेकिन, अगर यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में कानून बनता है और इसके शुल्क संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल किया जाता है तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों के लिए अमेरिका के साथ व्यापार की लागत और कूटनीतिक दबाव दोनों बढ़ सकते हैं।



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