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पटना। बिहार के पाटलिपुत्र चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के प्रभारी प्राचार्य पद से हटाए जाने के बाद डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने सरकार की कार्रवाई को एकतरफा और तानाशाही बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से न्याय की गुहार लगाई, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की इच्छा जताई और दावा किया कि दुर्घटना में झुलसने के बावजूद बिना उनका पक्ष सुने उन्हें पद से हटा दिया गया। 'कल तक प्रिंसिपल था, आज हटा दिया गया' डॉ. सिंह ने कहा कि उन्हें बिना किसी स्पष्टीकरण के पद से हटा दिया गया। उन्होंने कहा, "कल तक मैं प्रिंसिपल था, आज नहीं हूं। मेरी बात न अधिकारियों ने सुनी, न मंत्री ने। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं, तानाशाही का उदाहरण है।" उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के उस आरोप को खारिज किया कि उन्होंने फोन नहीं उठाया और कहा कि दुर्घटना में झुलसने के कारण उनकी तबीयत खराब थी और ऐसी स्थिति में लगातार फोन उठाना संभव नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने विभाग के सचिव और मंत्री के निजी सचिव को कई बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। 'सरकारी गाड़ी घर पर थी क्योंकि वहीं क्लीनिक भी है' डॉ. सिंह ने सरकारी गाड़ी निजी क्लीनिक के बाहर मिलने के सवाल पर कहा कि उनका घर और क्लीनिक एक ही परिसर में है, इसलिए गाड़ी वहां खड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर उनके खिलाफ माहौल बनाया गया। उन्होंने कहा, "मैं कोई चूहा नहीं हूं जो बिल में छिप जाऊं। एक दिन अस्पताल नहीं पहुंचने का मतलब यह नहीं कि मैं सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा था।" वीआरएस लेने का ऐलान, आईएमए और विपक्ष से मांगा समर्थन पूर्व प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि अब वह इस शासन व्यवस्था में काम नहीं करना चाहते और सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) देने की मांग करेंगे। उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और विपक्षी दलों से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। 'पीएमसीएच को सुधारने में पूरी ताकत लगा दी' डॉ. सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएमसीएच की व्यवस्था सुधारने, चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और संस्थान को नई दिशा देने के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया लेकिन उनके योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि जिस स्थिति में पीएमसीएच चल रहा है, उस हालत में तो इसे डी-रिकग्नाइज कर देना चाहिए था। क्या है पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार 23 जून को पीएमसीएच के निरीक्षण पर पहुंचे थे। उस समय डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ड्यूटी से अनुपस्थित मिले। विभाग के अनुसार उन्होंने न तो अवकाश लिया था और न ही किसी अधिकारी को प्रभार सौंपा था। जांच में यह भी दावा किया गया कि वह उस दौरान अपने निजी क्लीनिक में मौजूद थे और सरकारी वाहन भी वहीं खड़ा मिला। निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, कर्तव्यहीनता, अनधिकृत अनुपस्थिति और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला मानते हुए उन्हें पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया के मनोरोग विभाग के प्रिंसिपल पद पर तैनात कर दिया।