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धनबाद। कोयला मजदूरों के नए वेतन समझौते एनसीडब्ल्यूए-12 के गठन, बोनस और वेतन निर्धारण में हो रही देरी के विरोध में भारतीय मजदूर संघ ने शुक्रवार को कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में जनजागृति अभियान तेज करते हुए आरोप लगाया कि एनसीडब्ल्यूए-11 की अवधि समाप्त होने के बावजूद प्रबंधन ने अब तक नए वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। 17 से 23 अगस्त तक चलेगा अभियान अभियान के तहत धनबाद के भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के जुबली हॉल में आयोजित सभा में मजदूरों से उनकी मांगों और आगे के आंदोलन की रणनीति पर राय ली गई। भारतीय मजदूर संघ का यह जनजागृति अभियान 17 अगस्त से शुरू हुआ है और 23 अगस्त तक कोल इंडिया की सभी कंपनियों में चलेगा। अभियान का उद्देश्य श्रमिकों को नए वेतन समझौते में हो रही देरी और उनकी मांगों के प्रति जागरूक करना है। बीसीसीएल के जुबली हॉल में जुटे श्रमिक अभियान के तहत 21 अगस्त को बीसीसीएल धनबाद के जुबली हॉल में सभा आयोजित की गई। सभा को अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के उपाध्यक्ष और भारतीय मजदूर संघ, झारखंड प्रदेश के सह मंत्री अंगद उपाध्याय ने संबोधित किया। ‘एनसीडब्ल्यूए-11 खत्म, लेकिन नए समझौते की प्रक्रिया शुरू नहीं’ श्री उपाध्याय ने कहा कि एनसीडब्ल्यूए-11 की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है लेकिन अब तक कोल इंडिया प्रबंधन ने एनसीडब्ल्यूए-12 के गठन की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है। उन्होंने कहा कि इसी देरी के विरोध में श्रमिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मजदूरों से पूछा—नए समझौते में क्या सुविधाएं चाहिए सभा के दौरान श्रमिकों से यह जानने का प्रयास किया गया कि वे एनसीडब्ल्यूए-12 में किन सुविधाओं और प्रावधानों को शामिल कराना चाहते हैं। मजदूरों के वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार संबंधी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। आगे के आंदोलन की रणनीति पर भी मंथन भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने श्रमिकों के उत्थान और भविष्य के आंदोलन की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया। संगठन ने संकेत दिया कि यदि प्रबंधन ने जल्द पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अवैध कोयला खनन पर रोक लगाने की मांग सभा में अवैध कोयला खनन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने कहा कि अवैध खनन से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि खदान क्षेत्रों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौती भी बढ़ती है। बीमार श्रमिकों के मेडिकल अनफिट मामलों पर जोर लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे श्रमिकों को नियमानुसार मेडिकल अनफिट घोषित करने की प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई। संगठन ने मांग की कि ऐसे मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। अनुकंपा नियुक्ति में देरी से परिवार परेशान मृत या अक्षम श्रमिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई गई। संगठन का कहना है कि नियुक्ति लंबित रहने से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। बेहतर अस्पताल और डॉक्टरों की मांग कोयला श्रमिकों के इलाज के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और पर्याप्त संख्या में डॉक्टर उपलब्ध कराने की मांग भी सभा में उठाई गई। संगठन ने कहा कि जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना चाहिए। हजारों श्रमिक परिवारों से जुड़ा है मामला भारतीय मजदूर संघ का कहना है कि एनसीडब्ल्यूए-12 केवल वेतन समझौते का विषय नहीं है, बल्कि इससे बोनस, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और हजारों कोयला मजदूर परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इसलिए समझौते के गठन में हो रही देरी को जल्द समाप्त कर श्रमिकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए।