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नई दिल्ली। बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम अटका है तो आज ही निपटा लेना बेहतर होगा। केंद्र सरकार ने तीन दिन की प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले रविवार को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को सामान्य रूप से खोलने का फैसला किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, ऑटोमैटेड टेलर मशीन (एटीएम) लिंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट को 27 सितंबर को पूरी तरह चालू रखने की अनुमति दी है। इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को बैंक यूनियनों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में सरकारी बैंक शाखाओं में चेक क्लियरेंस, नकद जमा, फिजिकल डॉक्यूमेंटेशन और शाखा से जुड़े दूसरे काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहने की उम्मीद है। 10 साल बाद रविवार को बैंकिंग रविवार को बैंक खोलने का यह असामान्य फैसला है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि हड़ताल से पहले ग्राहकों को अपने जरूरी काम पूरे करने का अतिरिक्त मौका मिल सके। खास तौर पर महीने के आखिरी दिनों में बैंकिंग जरूरतों को देखते हुए रविवार को शाखाएं खोलने का फैसला किया गया। इससे पहले नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान रविवार को भी बैंक खोले गए थे, जब पुराने 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोट जमा करने और बदलने के लिए बैंकों में भारी भीड़ उमड़ी थी। क्यों हो रही है 3 दिन की हड़ताल हड़ताल का सबसे बड़ा मुद्दा बैंक कर्मचारियों की 5-डे वर्किंग यानी सप्ताह में पांच दिन काम की मांग है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल का आह्वान किया है। सरकार के मुताबिक इससे पहले बातचीत और सुलह के कई दौर हो चुके हैं। वित्त मंत्रालय ने 21 सितंबर को कर्मचारियों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की थी। सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यूनियनों की दो प्रमुख मांगों में पीएलआई योजना को वापस लेने या स्थगित रखने का मुद्दा भी था और सरकार ने पीएलआई स्कीम को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसके बाद पांच दिन की बैंकिंग प्रमुख लंबित मांग बनी हुई है। एसबीआई-पीएनबी समेत सरकारी बैंकों पर असर हड़ताल से स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को एमटीम में पर्याप्त नकदी रखने और ग्राहकों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। इसलिए ग्राहकों के लिए सीधी बात है कि चेक क्लियरेंस, नकद जमा, पासबुक/दस्तावेज, खाता बंद कराने या शाखा में जाकर किए जाने वाले जरूरी काम हैं तो आज निपटा लेना सुविधाजनक रहेगा। हड़ताल में एटीएम से मिलेगी राहत हड़ताल के दौरान डिजिटल बैंकिंग ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सहारा रहेगी। एसबीआई ने 28 से 30 सितंबर के दौरान एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज माफ करने की घोषणा की है , जिससे तय फ्री लिमिट पार होने के बाद भी इन तीन दिनों में उसके ग्राहकों को राहत मिलेगी। आम दिनों में एटीएम का क्या है नियम आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, बचत खाता ग्राहकों को अपने बैंक के एटीएम से हर महीने कम से कम 5 मुफ्त वित्तीय ट्रांजैक्शन मिलते हैं। दूसरे बैंक के एमटीएम पर छह मेट्रो शहरों बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली में कम से कम 3 , जबकि गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा है। नि:शुलक सीमा खत्म होने के बाद बैंक ग्राहक से अधिकतम 23 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन के साथ लागू टैक्स वसूल सकता है। क्या चलेगा, क्या हो सकता है प्रभावित शाखा आधारित सेवाओं पर असर: चेक क्लियरेंस, काउंटर से नकद लेन-देन, फिजिकल डॉक्यूमेंटेशन और शाखा में होने वाले दूसरे काम बाधित हो सकते हैं। दूसरी ओर यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सुविधाएं जारी रखने की तैयारी है। हालांकि एटीएम चालू रहने का मतलब हर मशीन में हर समय कैश उपलब्ध होने की गारंटी नहीं है। इसी वजह से वित्त मंत्रालय ने बैंकों को एटीएम में पर्याप्त नकदी रखने के निर्देश दिए हैं।