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वाशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान को आजाद हुए लगभग 80 साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच अविश्वास और दूरी अब भी गहरी बनी हुई है। अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर की नई सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के ज्यादातर नागरिक एक-दूसरे को अपना सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा मानते हैं। इतना ही नहीं, दोनों देशों के लोगों को यह भरोसा भी नहीं है कि दूसरा देश बेहतर संबंध बनाने को लेकर ईमानदार है। भारत पर पाकिस्तान का सबसे कड़ा नजरिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत पाकिस्तानियों की भारत को लेकर राय नकारात्मक है। इनमें 73 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति अपनी राय को "बहुत नकारात्मक" बताया। दूसरी ओर, 78 प्रतिशत भारतीयों ने पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय व्यक्त की। इनमें 65 प्रतिशत लोगों ने पाकिस्तान को लेकर बेहद नकारात्मक सोच जाहिर की जबकि लगभग 15 प्रतिशत भारतीयों ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। भारतीय मुसलमानों और हिंदुओं की राय में दिखा अंतर सर्वे में भारत के भीतर भी एक दिलचस्प अंतर सामने आया। 21 प्रतिशत भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा सिर्फ 6 प्रतिशत रहा। हालांकि दोनों समुदायों में बहुमत की राय पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक ही रही लेकिन मुसलमानों का नजरिया हिंदुओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम कठोर पाया गया। सबसे बड़ा खतरा? दोनों देशों ने एक-दूसरे का नाम लिया जब लोगों से पूछा गया कि उनके देश के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा कौन है, तो जवाब लगभग एक जैसे मिले। * 54 प्रतिशत भारतीयों ने पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा बताया। * 43 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने भारत को सबसे बड़ा खतरा माना। भारत में पाकिस्तान के बाद 21 प्रतिशत लोगों ने चीन को दूसरा सबसे बड़ा खतरा बताया। वहीं, पाकिस्तान में 24-24 प्रतिशत लोगों ने इज़राइल और अमेरिका को अगला बड़ा खतरा माना। भरोसा सिर्फ अपने देश पर, पड़ोसी पर नहीं सर्वे का सबसे अहम निष्कर्ष यह रहा कि दोनों देशों के लोग अपनी सरकार और अपने नागरिकों पर तो भरोसा जताते हैं लेकिन पड़ोसी देश की नीयत पर विश्वास नहीं करते। भारत के अधिकांश लोगों का मानना है कि पाकिस्तान की सरकार और वहां के लोग अच्छे संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान के अधिकांश नागरिकों ने भी यही राय भारत की सरकार और जनता के बारे में व्यक्त की। यानी राजनीतिक तनाव का असर अब केवल सरकारों तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों की सोच में भी साफ दिखाई देता है। दोस्त चुनने में भी दोनों देशों की राह अलग वैश्विक राजनीति को लेकर भारत और पाकिस्तान की सोच में बड़ा अंतर दिखाई दिया। पाकिस्तान के 75 प्रतिशत लोगों ने चीन को अपना सबसे बड़ा सहयोगी बताया। इसके बाद 12 प्रतिशत लोगों ने सऊदी अरब का नाम लिया। वहीं, भारत में तस्वीर बिल्कुल अलग रही। 36 प्रतिशत भारतीयों ने रूस को अपना सबसे अहम सहयोगी माना जबकि 16 प्रतिशत ने अमेरिका को सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताया। करीब एक-तिहाई भारतीयों ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया। अमेरिका, चीन और रूस पर भी सोच अलग-अलग भारतीयों की राय अमेरिका और रूस के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक रही। 58 प्रतिशत भारतीयों ने रूस को लेकर सकारात्मक राय जताई जबकि 51 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा व्यक्त किया। इसके विपरीत पाकिस्तान में केवल 39 प्रतिशत लोगों की रूस के प्रति सकारात्मक राय रही और 32 प्रतिशत लोगों ने पुतिन पर भरोसा जताया। चीन को लेकर पाकिस्तान में जबरदस्त समर्थन दिखा। 90 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने चीन के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की जबकि 83 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर भरोसा जताया। भारत में चीन और शी जिनपिंग को लेकर राय काफी नकारात्मक रही। केवल करीब एक-चौथाई भारतीयों ने चीन या उसके राष्ट्रपति के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। भारत अमेरिका के ज्यादा करीब, पाकिस्तान चीन के साथ रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल देशों में भारत उन चुनिंदा देशों में रहा, जहां लोगों ने अमेरिका को चीन से अधिक सकारात्मक नजरिए से देखा। वहीं, पाकिस्तान उन देशों में शामिल रहा, जहां अमेरिका और चीन के बीच सकारात्मक राय का सबसे बड़ा अंतर देखने को मिला और लोगों ने भारी बहुमत से चीन का समर्थन किया। 4,600 से ज्यादा लोगों की राय पर आधारित रिपोर्ट यह सर्वे भारत में 3,566 और पाकिस्तान में 1,039 लोगों के बीच किया गया। भारत में सर्वे 8 फरवरी से 27 अप्रैल 2026 के बीच हुआ, जबकि पाकिस्तान में 8 अप्रैल से 7 मई 2026 के बीच लोगों से बातचीत की गई। रिपोर्ट का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों की विदेश नीति, वैश्विक शक्तियों और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सोच को समझना था।