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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है और ऐसा नहीं होने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। 13 करोड़ मतदाताओं को लेकर बड़ा दावा सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि देशभर में अब तक 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि पश्चिम बंगाल में 97 लाख लोगों को मतदान से वंचित किया गया। उन्होंने इन आंकड़ों को 2024 के लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि राजग और इंडिया गठबंधन के बीच केवल तीन प्रतिशत का अंतर था, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने के सवाल की अनदेखी नहीं की जा सकती। चुनाव चिह्न के फैसलों पर भी उठाए सवाल श्री दिपके ने मतदाता सूची के साथ चुनाव चिह्न से जुड़े फैसलों को भी निशाने पर लिया है। दिपके ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए और भाजपा से जुड़ी ‘शेल’ पार्टियों को चिह्न दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस का जिक्र करते हुए भी इसी तरह का आरोप लगाया। एसआईआर के बहाने अधिकार छीनने का आरोप सीजेपी के संस्थापक सदस्य एवं सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पूरे विवाद को मतदान के अधिकार से जोड़ते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एसआईआर के जरिए 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया गया है और आगे ऐसे लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से भी वंचित किए जाने का खतरा है। उन्होंने गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार का जिक्र करते हुए मतदाता पहचान और जनकल्याण योजनाओं को कथित रूप से आपस में जोड़ने पर आपत्ति जताई। नए वोटरों की एंट्री में बाधा का आरोप पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मामले में एक और मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि नए और युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत फॉर्म-6 में नए मतदाताओं से उनके माता-पिता के पिछले एसआईआर में शामिल होने से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। दास ने दावा किया कि यह जानकारी वैकल्पिक बताई जाती है, लेकिन सॉफ्टवेयर में इसे अनिवार्य माना जा रहा है। सीजेपी ने इसे खास तौर पर जेन-ज़ी मतदाताओं की मतदाता सूची में एंट्री के रास्ते में बाधा बताया है। बंगाल में 60 लाख नाम हटाने का दावा श्री दास ने पश्चिम बंगाल को लेकर भी आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि वहां 60 लाख लोगों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर मतदाता सूची से हटाया गया , जिनमें बाद में 33 लाख लोगों को दोबारा सूची में शामिल किया गया। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद होने का दावा किया। इस्तीफे से आगे बढ़ीं सीजेपी की मांगें सीजेपी ने सिर्फ श्री ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग नहीं की है। पार्टी ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए यह भी पूछा है कि उन्हें निर्देश कौन दे रहा है। इसके अलावा पार्टी ने एसआईआर को तत्काल रोकने और आगामी सभी चुनाव स्थगित करने की मांग की है। सीजेपी ने उच्चतम न्यायालय से एसआईआर से जुड़ी फाइलों को अपने नियंत्रण में लेने की मांग भी की है। पार्टी का तर्क है कि इससे रिकॉर्ड के साथ किसी संभावित छेड़छाड़ की आशंका को दूर किया जा सकेगा। चुनाव आयोग से जुड़े कानून को भी बदलने की मांग सीजेपी ने चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून को भी खत्म कर उसकी जगह नई कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग उठाई है। सीजेपी का कहना है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा कायम रह सके। पार्टी नेताओं ने पूरे मुद्दे को मतदान के अधिकार से जोड़ते हुए युवाओं और सामाजिक संगठनों से भी आगे आने की अपील की।