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सूरज कुमार सिंह मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार और भारतीय बॉन्ड बाजार में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी के समर्थन से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया बीते सप्ताह करीब 0.8 प्रतिशत मजबूत होकर 11 सप्ताह के सर्वोच्च साप्ताहिक स्तर 94.33 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बीते सप्ताह शानदार मजबूती के साथ उभरा और 11 सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज करते हुए लगभग 0.8 प्रतिशत मजबूत हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और रिजर्व बैंक के हालिया कदमों ने रुपये को मजबूत आधार दिया, हालांकि सप्ताह के अंत में मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इसकी तेजी की रफ्तार कुछ धीमी कर दी। एक सप्ताह में 95.29 से 94.33 तक आया डॉलर 12 जून को एक डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 95.29 के स्तर पर था, जबकि 19 जून को यह मजबूत होकर लगभग 94.33 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इस तरह एक सप्ताह में भारतीय मुद्रा ने करीब 96 पैसे की मजबूती हासिल की, जो हाल के महीनों में सबसे बेहतर साप्ताहिक प्रदर्शन में से एक है। तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा रुपये की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी रही। अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों से तेल की कीमतें नीचे आईं, जिससे भारत के आयात बिल और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं कम हुईं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होने का सीधा फायदा रुपये को मिला। विदेशी निवेश और आरबीआई के कदमों से बढ़ा भरोसा विश्लेषकों के अनुसार, सरकारी बॉन्ड में मजबूत विदेशी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों ने भी रुपये को मजबूती दी। आरबीआई की नीतियों से डॉलर की आमद बढ़ी और बाजार में रुपये के प्रति विश्वास मजबूत हुआ। फेड की सख्ती बनी चुनौती हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सतर्क और अपेक्षाकृत सख्त रुख ने डॉलर को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी। फेड द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने के संकेतों से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ, जिसने रुपये की तेजी पर कुछ दबाव बनाया। फॉरेक्स रिजर्व में बड़ी गिरावट इस बीच, 19 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर घटकर 671.62 अरब डॉलर रह गया। हालांकि यह गिरावट बाजार के लिए चिंता का विषय रही, लेकिन रुपये की मजबूती पर इसका तत्काल असर सीमित रहा। आगे क्या? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान संबंधों, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता, विदेशी निवेश प्रवाह और अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति से तय होगी। यदि तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहता है तो रुपया निकट भविष्य में और मजबूती दिखा सकता है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव या डॉलर की नई मजबूती इसकी राह में बाधा बन सकती है।