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नई दिल्ली। महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि खाने-पीने की चीजों, ईंधन और सोना-चांदी के बढ़ते दामों के चलते इस वर्ष मई में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई 3.48 फीसदी थी, जो मई में बढ़कर 3.93 फीसदी हो गई। यह लगातार चौथा महीना है जब महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। टमाटर की रफ्तार सोने से भी तेज इस बार महंगाई के आंकड़ों में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि टमाटर ने भी सोने को पीछे छोड़ दिया। एक साल पहले की तुलना में टमाटर की कीमतों में करीब 48 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जबकि सोना, हीरा और प्लेटिनम के गहनों की कीमतें 41 फीसदी बढ़ीं।हालांकि सबसे बड़ी छलांग चांदी के गहनों में देखने को मिली, जिनकी कीमतें एक साल में 155 फीसदी तक बढ़ गईं। गांवों में ज्यादा महसूस हुई महंगाई महंगाई का असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिला। मई में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 4.25 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.53 फीसदी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें ग्रामीण परिवारों पर ज्यादा असर डाल रही हैं। खाने की थाली हुई महंगी खाद्य महंगाई दर मई में 4.78 फीसदी रही। वहीं पान और तंबाकू उत्पादों की महंगाई 6.62 फीसदी तथा माल परिवहन सेवाओं की महंगाई 7.63 फीसदी दर्ज की गई। यानी केवल खाने की चीजें ही नहीं, बल्कि सामान ढोने की लागत बढ़ने से भी बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। कुछ चीजों ने दी राहत भी महंगाई के बीच कुछ अच्छी खबरें भी आई हैं। आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा मटर 11 फीसदी और मोटर कार एवं जीप करीब 7 फीसदी सस्ती हुई हैं। किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई मई में सबसे ज्यादा खुदरा महंगाई तेलंगाना में दर्ज की गई, जहां यह 6.71 फीसदी रही। इसके बाद: * तमिलनाडु – 5.11% * आंध्र प्रदेश – 4.90% * कर्नाटक – 4.59% * ओडिशा – 4.54% इन राज्यों में लोगों को महंगाई का असर देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा महसूस हुआ। आगे क्या विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। हालांकि अच्छी मानसून बारिश और बेहतर फसल उत्पादन से कीमतों पर कुछ नियंत्रण मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। फिलहाल इतना तय है कि आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव अभी बना हुआ है।



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