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पटना। बिहार में शिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए अलग ‘शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय’ स्थापित करने के साथ ही शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की नई तकनीकों से प्रशिक्षित करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और सर्वम एआई जैसी अग्रणी तकनीकी संस्थाओं के सहयोग से आधुनिक एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षक दिवस पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य मैट्रिक परीक्षा खत्म होने के सात दिनों के भीतर रिजल्ट जारी करना, आपत्ति होने पर विद्यार्थियों को 15 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा का मौका देना और इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक का रिजल्ट 24 घंटे में जारी करने की व्यवस्था विकसित करना है। सात लाख से ज्यादा शिक्षकों के लिए अलग प्रशिक्षण विश्वविद्यालय श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक तक सात लाख से अधिक शिक्षक हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों को समय-समय पर आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए अलग विश्वविद्यालय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसका मकसद शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाना, उनकी क्षमता का विकास करना और बदलती शिक्षा पद्धतियों के अनुरूप उन्हें नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। एआई से बदलेगी शिक्षकों की ट्रेनिंग, गूगल से हुआ समझौता मुख्यमंत्री ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और सर्वम एआई जैसी संस्थाओं के सहयोग से बिहार में आधुनिक एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके जरिए शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी दिशा में कार्यक्रम के दौरान बिहार शिक्षा विभाग और गूगल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किया गया। सरकार की कोशिश है कि शिक्षक सिर्फ पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि डिजिटल और एआई आधारित शिक्षण प्रणालियों से भी जुड़ें। बिहार में बीएचयू सेंटर स्थापित करने का प्रयास मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा को लेकर भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार के विद्यार्थियों को राज्य में ही उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू का सेंटर बिहार में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि मैट्रिक परीक्षा समाप्त होने के सात दिनों के भीतर रिजल्ट जारी कर दिया जाए। यदि किसी विद्यार्थी को अपने प्राप्तांक को लेकर आपत्ति होती है, तो ऐसी व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है, जिसमें उसे 15 दिनों के भीतर निर्धारित स्लॉट में दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल सके। इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक का रिजल्ट 24 घंटे में देने की तैयारी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी प्रणाली विकसित करना चाहती है, जिसमें इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों का रिजल्ट 24 घंटे के भीतर जारी किया जा सके। परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में कमिटी का गठन भी किया गया है। यह कमिटी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को सुझाव देगी और सरकार उन सुझावों पर अमल करेगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम में देरी होने से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और नामांकन में परेशानी होती है। इसी समस्या को देखते हुए परीक्षा व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने और सेंटरवार रिजल्ट जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से इस दिशा में जरूरी सुधार करने को कहा। करीब 700 ‘सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल’ का लक्ष्य श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में करीब 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को नीट और जेईई की तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ घर से आने-जाने वाले विद्यार्थियों के लिए भी लाइव ऑनलाइन शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थी जरूरत पड़ने पर रात 12 बजे भी ऑनलाइन शिक्षक की मदद से पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होंने बिहार के प्राचीन शैक्षणिक गौरव का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय के बाद अब विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 15 जुलाई को पूरी कर ली गई है और अगले एक वर्ष में इसे धरातल पर उतारने की दिशा में काम किया जाएगा। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट 46 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत मुख्यमंत्री ने बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों को लेकर आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वर्ष 2004-05 में प्राथमिक विद्यालय स्तर पर ड्रॉपआउट करीब 46 प्रतिशत था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 2 प्रतिशत रह गया है। माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट पहले करीब 73 प्रतिशत था, जो अब 10 प्रतिशत से कम हो गया है। उच्च माध्यमिक स्तर पर पहले करीब 83 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल छोड़ देते थे , जबकि अब यह दर 7 प्रतिशत से नीचे आ गई है। इसी तरह स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों का प्रतिशत करीब 12 प्रतिशत से घटकर 1.7 प्रतिशत रह गया है। बीपीएससी से 33 हजार से ज्यादा शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया जारी श्री चौधरी ने शिक्षक नियुक्ति का जिक्र किया और कहा कि बिहार लोक सेवा आयोग ( बीपीएससी) के माध्यम से 33 हजार से अधिक शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही शिक्षकों को समय पर वेतन उपलब्ध कराने के लिए पूरी व्यवस्था को एक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि मदरसा और संस्कृत बोर्ड के शिक्षकों के लंबित वेतन का भुगतान जारी कर दिया गया है, ताकि शिक्षकों को समय पर उनका पारिश्रमिक मिल सके। उन्होंने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से वेतनमान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।