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तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ( आईआरजीसी ) ने ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन के अल-अजरक एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के दो विध्वंसक युद्धपोतों को निशाना बनाने के दावे को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ( सेंटकॉम ) ने खारिज करते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला सफल नहीं हुआ और आईआरजीसी के सभी प्रयास विफल रहे। एफ-35, एफ-16 और एफ-15 की तैनाती वाले हिस्सों को बनाया निशाना ईरानी प्रसारक प्रेस टीवी ने बुधवार को आईआरजीसी के हवाले से बताया कि जॉर्डन स्थित अल-अजरक एयर बेस पर उन स्थानों को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं और उनका रखरखाव किया जाता है। आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। रिपोर्ट में लड़ाकू विमानों या एयर बेस को हुए नुकसान का ब्योरा नहीं दिया गया है। क्रूज मिसाइलों और एजिस प्रणाली से लैस युद्धपोतों पर हमले का दावा आईआरजीसी ने अमेरिकी नौसेना के दो विध्वंसक युद्धपोतों पर मिसाइल हमले करने का भी दावा किया। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों युद्धपोत क्रूज मिसाइलों और एजिस रक्षा प्रणाली से लैस थे। सेंटकॉम ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि मध्य पूर्व में अभियान चला रहे किसी भी अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को हमला नहीं लगा है। अमेरिकी कमान के मुताबिक, आईआरजीसी की ओर से किए गए सभी हमले नाकाम रहे। अमेरिका ने कहा—एक सप्ताह में दस ईरानी टैंकर नष्ट सेंटकॉम ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि अमेरिकी बलों ने पिछले एक सप्ताह में दस ईरानी टैंकर नष्ट किए हैं। अमेरिकी कमान का आरोप है कि ये जहाज आईआरजीसी को वित्तीय मदद पहुंचाने वाले अरबों डॉलर के गुप्त नेटवर्क का हिस्सा थे। इससे पहले सेंटकॉम ने अमेरिकी सेना द्वारा पांच ईरानी टैंकर नष्ट किए जाने की जानकारी दी थी। ईरान ने इन्हीं टैंकरों पर हमलों के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और युद्धपोतों को निशाना बनाने की बात कही है।