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मुंबई। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, स्वर्ण भंडार, एसडीआर और आईएमएफ के पास आरक्षित निधि में बढ़ोतरी के दम पर 3 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.3 अरब डॉलर बढ़कर 674.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट के बाद रिजर्व में फिर मजबूती लौटती दिखी। आरबीआई के आंकड़ों में दिखी मजबूत रिकवरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी कई मोर्चों पर आई मजबूती की वजह से हुई। फॉरेन करेंसी एसेट्स , गोल्ड रिजर्व , स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) और आईएमएफ के पास भारत की रिजर्व पोजिशन चारों में इजाफा दर्ज किया गया। यही वजह रही कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार एक ही हफ्ते में 7 अरब डॉलर से ज्यादा उछल गया। सबसे बड़ा सहारा बनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति देश की विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति , जो फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा होती है, उसमें भी मजबूत बढ़त देखने को मिली। यह आंकड़ा 541.1 अरब डॉलर से बढ़कर 545.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यानी सिर्फ इस हिस्से में ही करीब 4.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। यह संकेत देता है कि भारत के पास विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्ति फिर से मजबूत हुई है, जो बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ाती है। गोल्ड रिजर्व भी चमका सिर्फ डॉलर रिजर्व ही नहीं, बल्कि भारत के स्वर्ण भंडार में भी शानदार बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड रिजर्व 102.5 अरब डॉलर से बढ़कर 105.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यानी इसमें करीब 2.7 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। गोल्ड रिजर्व में यह बढ़त इसलिए भी अहम है क्योंकि सोना किसी भी देश के रिजर्व को स्थिरता और सुरक्षा देने वाला बड़ा सहारा माना जाता है। एसडीआर और आईएमएफ रिजर्व पोजिशन में भी बढ़त भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) होल्डिंग भी बढ़ी है। यह 18.55 अरब डॉलर से बढ़कर 18.6 अरब डॉलर हो गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की रिजर्व पोजिशन भी 4.77 अरब डॉलर से बढ़कर 4.78 अरब डॉलर हो गई।भले ही इन दोनों हिस्सों में बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं रही, लेकिन कुल रिजर्व को ऊपर ले जाने में इनका भी योगदान रहा। पिछले हफ्ते 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था रिजर्व दिलचस्प बात यह है कि इससे एक हफ्ते पहले ही भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घट गया था । उस गिरावट के बाद रिजर्व 666.933 अरब डॉलर पर आ गया था, जो करीब 15 महीने का सबसे निचला स्तर था। ऐसे में इस हफ्ते आई 7.3 अरब डॉलर की तेजी को एक मजबूत रिकवरी के तौर पर देखा जा रहा है। आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े सिर्फ अर्थशास्त्र की किताबों तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनका असर देश की आर्थिक मजबूती , रुपये की स्थिरता , आयात भुगतान क्षमता और वैश्विक भरोसे से जुड़ा होता है। जब किसी देश के पास बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो वह: * डॉलर की कमी जैसी स्थिति से बेहतर तरीके से निपट सकता है * कच्चे तेल और दूसरी जरूरी चीजों के आयात का भुगतान आसानी से कर सकता है * रुपये पर दबाव कम करने में मदद पा सकता है * वैश्विक निवेशकों के सामने ज्यादा मजबूत नजर आता है एक नजर में ताजा आंकड़े कुल विदेशी मुद्रा भंडार: 674.2 अरब डॉलर साप्ताहिक बढ़ोतरी: 7.3 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति: 545.6 अरब डॉलर गोल्ड रिजर्व: 105.2 अरब डॉलर एसडीआर: 18.6 अरब डॉलर आईएमएफ के पास रिजर्व पोजिशन: 4.78 अरब डॉलर



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